विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०४ आनन्द मन्दिर
मिलते है जिसके कारण वह इस जन्म में नर्क भोग से अधिक
कष्ट और दुःख भोगता है तथा परलोक मे इससे अधिक बुरी
गति को प्राप्त होता है।
पृथुजघनकुचाभिर्यौवनोन्मादिनीभि-
र्नवमृगमदमिश्रैः कुंकुमैश्चर्चिताभिः ।
भवति शिशिरशान्तिः स्त्रीभिरालिङ्गिताभि-
र्निशि निशि पुरुषाणां जन्मसाफल्यभाजाम् ॥
सौन्दर्य और रूप की मदमाती युवती पत्नी, जिसने कस्तूरी
मिली केशर शरीर मे लगा रक्खी है ऐसी अपनी प्यारी स्त्री को
इस शीतकाल मे आलिगन कर दाम्पत्य प्रेम का अनुभव करते है
अर्थात् सुख भोग करते हैं, आनन्द मे रात्रियों को व्यतीत करते
हैं उन्ही मनुष्यो का जन्म सफल होता है । वे पति पत्नी धन्य
हैं ऐसा आयुर्वेद कहता है।
जो अपनी प्यारी पत्नी से विरुद्ध पर स्त्री गमन अथवा
वेश्या-गमन करते हैं वे मूर्ख अपना बहुमूल्य जीवन नष्ट करते
हैं। जो पुरुष अपनी सुन्दर रूप वाली अथवा कुरूप पत्नी जो
विधाता ने अपने भाग्य से दे रक्खी है वह कैसी ही हो उसका
निरादर करके, उसको दु खी करके, उसके आत्मा को कष्ट देकर
आप पर स्त्री अथवा वेश्याओ से प्रेम करते हैं वे अपने पैरो मे
आप कुठाराघात करते हैं। उनका मनुष्य जन्म व्यर्थ है। उन्हें
परकाल में भी यम यातना का कष्ट भोगना पड़ता है।