विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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ऋतुचर्या
हेमन्त ऋतु का आहार विहार
( अगहन और पौष हेमन्त ऋतु )
स्त्री पुरुषो की आरोग्यता और दीर्घ जीवन, संभोग और
सौन्दर्य तथा दाम्पत्य प्रेम के लिये यहां आयुर्वेद के अनुसार
आहार विहार की ऋतुचर्या विधि लिखी जाती है ।
दीर्घप्रचार सुरता किल यत्र रात्रिः,
सुशीतलं वारि विना च यत्नात् ।
यः प्रेयसीकुचयुगं परिरभ्य शेते,
स्वर्गोऽपि तस्य हृदये तृणवद्विभाति ॥
जिस हेमन्तऋतु मे बहुत काल पर्यन्त संभोग करने योग्य
रात्रि और बिना यत्न के ठढा पानी रहता है ( बर्फ की जरूरत
नही ) ऐसे समय मे जो अपनी प्राण प्यारी पत्नी को आलिंगन
कर शयन कर रात्रि व्यतीत करता है वह पुरुष धन्य है। उस
पुरुष को स्वर्ग सुख भी तृण के समान प्रतीत होता है ।
इसके विरुद्ध जो पुरुष अपनी प्यारी पत्नी को छोड़ पर स्त्री
अथवा वेश्या से प्रेम करता है वह मूर्ख इस लोक और परलोक
दोनो में अपना जीवन नष्ट करता है। उसे कुछ दिन में इस कुकर्म
के फल निर्धनता, प्रमेह, गर्मी, सुजाक आदि के रूप मे अवश्य