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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 159

६२ आनन्द मन्दिर
अंगूठे से शिर तक चढ़ता है और फिर दूसरे पक्ष मे शिर से
उतर कर उसी क्रम से दूसरी ओर से पैर के अंगूठे पर आता है।
इस प्रकार आर्तव का हर महीने एक चक्कर पूरे शरीर में
होकर योनि मार्ग से निकलता है। जितने आर्तव की गर्भ धारण
के लिये शरीर को आवश्यकता है उतना शरीर मे प्रकृति रहने
देती है। इसी प्रकार आहार विहार के अनुसार फिर आर्तव
बनना आरम्भ होता है और महीने भर तक बनता तथा शरीर
मे चक्कर लगाता है वही समय पर फिर निकलता है।
इसके विषय मे अनेक ग्रन्थो मे यह पाया जाता है कि स्त्रियो
को स्खलित करने के लिये जिस स्थान मे जिस तिथि को कामदेव
हो उस तिथि को उस स्थान मे नख गडावे और आलिगन चुम्बन
आदि करे इससे स्त्री शीघ्र ही स्खलित होजाती है। किन्तु यह
बात बिलकुल मनगढंत है। इसका तात्पर्य कुछ और है।
कामशास्त्र सम्बन्धी जितनी पुस्तके प्रकाशित हुई है प्राय'
सब मे यह बतलाया गया है कि जिस तिथि को कामदेव जिस
स्थान पर हो उस स्थान को नखो से दातो से खीचे ताने, नाखून
गडावे इस विधि से स्त्री शीघ्र ही द्रवित होजाती है।
एक पुस्तक मे लिखा है स्त्री के अगो मे जिस समय काम
की स्थिति हो उस समय वहा पर चुम्बन करे नाखून गड़ावे, दांत
गडावे या ताड़न करे इन उपायो से स्त्री के कामदेव को जाग्रत करना
चाहिये। शिर के बालो को अपने हाथ की अंगुलियो मे लपेट
कर खींचना चाहिये।