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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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६६ आनन्द मन्दिर
चरण करना सब वर्णों का अर्थात् मनुष्य मात्र का कर्त्तव्य है।
तस्याः स्तनौ यदि घनौ जघनं विहारि ।
वक्त्रं च चारु तव चित्त किमाकुलत्वम् ॥
पुण्यं कुरुष्व यदि तेषु तवास्ति वाञ्छा ।
पुण्यैर्विना न हि भवन्ति समीहितार्थाः ॥
भर्तृहरि
हे कामेच्छुक पुरुषो ! पराई सुन्दर युवती स्त्री को देखकर
चित्त को क्यो विचलित करते हो । महात्माओ की आज्ञा पालन
करो । जो उपाय उन्होने बतलाए हैं उन उपायो मे सुन्दर भार्या
और सब सांसारिक सुखो के प्राप्त करने के सरल उपाय हैं।
श्लोक का भी यही अर्थ है—
जिस स्त्री के स्तन पुष्ट और जंघाए विहार करने योग्य हैं,
मुख सुन्दर है। उसे देखकर हे चित्त ! क्यो व्याकुल होता है, यदि
उनमे तेरी वांछा है तो पुण्य कर क्योकि पुण्य के विना मनोरथ
सिद्ध नही होते ।
ऋषियो ने ठीक बतलाया है:—
शुभ्रं सद्म सविभ्रमा युवतयः श्वेतातपत्रोज्ज्वला ।
लक्ष्मीरित्यनुभूयतेस्थिरमिव स्फीतेशुभे कर्मणि ॥
इसका अर्थ यह है कि:—
उत्तम स्वच्छ घर, अच्छे हाव भाव वाली सुन्दर स्त्री और