विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकामशास्त्र के ज्ञान की आवश्यकता ६३
लिये है अन्तर इतना है कि मनुष्य के सिवाय अन्य जीवों की रति-
क्रिया केवल गर्भाधान के ही लिये है आगे उसके अच्छे, बुरे रोगी
निरोगी अल्पायु या दीर्घायु होने का उन्हें कुछ भी ज्ञान नहीं।
आनन्द और सुख वे कुछ नहीं जानते। जब तक दूसरा बच्चा
न हो और पक्षियों मे जब तक वह स्वयं उड़ने लायक न होजाय
तब तक ही उसे खिलाने पिलाने का ज्ञान और प्रेम नर मादा
को रहता है। पशुओं के जब दूसरा बच्चा हो गया फिर पहिले की
कुछ भी परवाह नहीं रहती, कुछ भी प्रेम नहीं फिर तो वह पास
आता है तो माता मारने और काटखाने को दौड़ती है।
वात्सल्य प्रेम और जीवन भर उनकी आरोग्यता की चिन्ता
रखना उन्हें योग्य बनाना यह मनुष्यो मे ही है। इसलिये परमात्मा
ने मनुष्यों को ही इस योग्य बनाया है क्योकि सृष्टि की उन्नति
अवनति मनुष्यों पर ही निर्भर है और मनुष्य ही सृष्टि की सर्व-
श्रेष्ठ शोभा है। यदि मनुष्य न होता तो सृष्टि की कुछ भी शोभा
न होती इस लिये इस बात की अत्यन्त आवश्यकता है कि मनुष्य
आरोग्य रहकर दीर्घ जीवी हो और आरोग्य दीर्घजीवी सन्तान
उत्पन्न कर मनुष्य जीवन का आनन्द भोगे।
परमात्मा ने वेद भी इसी लिये बनाये हैं कि वेदों से सृष्टि
का ज्ञान हो। मनुष्य का कर्त्तव्य है कि वह उस ज्ञान को
प्राप्त कर उत्तम जीवन व्यतीत करे। संसार में वेद प्राणिमात्र
के विशेष कर मनुष्य मात्र के हित के ही लिये बनाये गये हैं। पशु
पक्षियों को उनकी आवश्यकता नहीं है।
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