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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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५६ भूमिका
भारत की मैं पतिव्रता हू, सुन दशकन्धर !
नश्वर है जब देह, मृत्यु का फिर क्या है डर ॥
देश धर्म के लिये, निछावर जो होती हैं,
कीर्ति-बीज को विपुल, विश्व में वे बोती हैं।
शारीरिक सुख के लिये, धर्म न छोडूंगी कभी,
कुल मर्यादा से नहीं, मैं मुख मोडूंगी कभी ॥
पर तू अच्छी बात, कभी क्या सुन सकता है,
मुक्ता को क्या कभी, चकोर चुन सकता है।
पूर्व पुण्य सब क्षीण हुये, मानो अब तेरे,
सभी काम विपरीत, लगे होने अब तेरे ॥
रोवेगा तू नरक मे, खोवेगा निज-राज को,
ईश्वर रक्खेगा सदा, राक्षस ! मेरी लाज को ।
इस प्रकार पर स्त्री सती-सीता की इच्छा करने वाला रावण
मारा गया । सुग्रीव की स्त्री की इच्छा करने वाला बालि मारा
गया ।
कीचक वध
पाण्डवो को महारानी द्रौपदी के सहित अज्ञातवास के
समय जब राजा विराट् के यहां रहना पड़ा। उस समय महारानी
द्रौपदी राजा विराट् के यहां दासी बनकर रही । उन्हीं के यहां
युधिष्ठिर भीम अर्जुन नकुल सहदेव भिन्न २ पदों पर कार्य
करने लगे ।