विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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इस ग्रन्थ के बारे में
विष्णुधर्मोत्तर पुराण एक विशाल उपपुराण है, जो स्वयं को विष्णु पुराण का परिशिष्ट या 'उत्तर भाग' बताता है। यह तीन खण्डों में है और भारतीय कलाओं के अध्ययन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। पहले खण्ड में सृष्टि, कल्प और मन्वन्तर, भूगोल और वंशावलियाँ हैं; दूसरे में राजधर्म, धर्मशास्त्र, ज्योतिष और आयुर्वेद जैसे विषय हैं; और तीसरे खण्ड में चित्रसूत्र (चित्रकला), संगीत, नृत्य, काव्य, प्रतिमा-लक्षण और मन्दिर-वास्तु का विस्तृत विवेचन है। तीसरे खण्ड का चित्रसूत्र भारतीय चित्रकला पर उपलब्ध सबसे प्राचीन शास्त्रीय विवरणों में गिना जाता है।
स्कैन की गई प्रति लगभग १००० पृष्ठों का सम्पूर्ण संस्कृत संस्करण है, जिसे बम्बई के श्रीवेङ्कटेश्वर यन्त्रालय ने छापा था; डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इण्डिया की सूची में इसका वर्ष १९२९ दर्ज है। आरम्भ में संस्कृत में लिखी प्रस्तावना है, जो भागवत और याज्ञवल्क्य स्मृति के वचनों से पुराणों का महत्त्व बताती है। इस संस्करण में हिन्दी अनुवाद नहीं है। प्रति पर हैदराबाद के सर्वोदय साहित्य मन्दिर की मुहर है।
कला-इतिहासकार, मूर्तिशास्त्र और भारतीय सौन्दर्यशास्त्र के अध्येता इस पुराण को मूल रूप में पढ़ने के लिए इस संस्करण का उपयोग कर सकते हैं।
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॥ अथ श्रीविष्णुमहापुराणे २ भागे विष्णुधर्मोत्तरे तृतीयखण्डप्रारम्भः ॥
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॥ अथ श्रीविष्णुमहापुराणे २ भागे विष्णुधर्मोत्तरे तृतीयखण्डप्रारम्भः ॥
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