विष्णु स्मृति (वैष्णव धर्मशास्त्र - नन्दपण्डित कृत वैजयन्ती टीका सहित सटीक)

विष्णु स्मृति (वैष्णव धर्मशास्त्र - नन्दपण्डित कृत वैजयन्ती टीका सहित सटीक)
Vishnu Smriti with Vaijayanti Commentary of Nanda Pandita
महर्षि विष्णु (टीकाकार: नन्दपण्डित, सम्पादक: जूलियस जॉली) द्वारा
DevanagariSanskritpublished392 पृष्ठ
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॥ विष्णुस्मृतौ ३ ॥ १३
स्यात्। ३५। साधूनां पूजनं कुर्यात्। ३६। दुष्टांश्च ह-
न्यात्। ३७। शत्रुमित्रोदासीनमध्यमेषु सामभेददान-
दण्डान्यथार्हं यथाकालं प्रयुञ्जीत। ३८। संधिविग्रहया-
नासनसंश्रयद्वैधीभावांश्च यथाकालमाश्रयेत्। ३६। चैत्रे
मार्गशीर्षे वा यात्रां यायात्।४०। परस्य व्यसने वा।४१।
परदेशावाप्तौ तद्देशधर्मान्नोच्छिन्द्यात्। ४२। परेणाभि-
युक्तश्च सर्वात्मना स्वं राष्ट्रं गोपायेत्।४३। नास्ति राज्ञां
समरे तनुत्यागसदृशो धर्मः। ४४। गोब्राह्मणनृपमित्र-
धनदारजीवितरक्षणार्थे हतास्ते स्वर्गलोकभाजः। ४५।
वर्णसंकररक्षणार्थं च।४६। राजा परपुरावाप्तौ तु तत्र
तत्कुलीनमभिषिञ्चेत्।४७। न राजकुलमुच्छिन्द्यात्।४८।
अन्यत्राकुलीन