विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 79, कुल 475 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ विनय-पत्रिका
जयति संजीवनी-समय-संकट हनूमान धनुवान-महिमा बखानी ।
बाहुबल विपुल परमिति पराक्रम अतुल, गूढ़ गति जानकी-जान जानी
जयति-रन-अजिर गंधर्व-गन-गर्वहर फिर किये राम गुनगाथ-गाता ।
मांडवी-चित्त-चातक-नवांबुद-वरन, सरन तुलसीदास अभय-दाता ॥५॥
शब्दार्थ—भूरि = बहुत । विबुधेश = इन्द्र । धनदादि = कुबेर इत्यादि । महाराज
सम्राज = महासाम्राज्य । प्रेमगामी = तल्लीन । जंत्रित = वशीभूत । चित्रकूटद्रि (चित्रकूट+
अद्रि) = चित्रकूट पर्वत । पादुका = खड़ाऊँ । पुहुमि = पृथिवी । परमिति = प्रमाण जानकी-
जान = रामचन्द्र । रन-अजिर = रणांगण, युद्धभूमि । गाता = गानेवाला, गायक । मांडवी =
भरतजीकी अर्द्धाङ्गिनी । नवांबुद (नव+अम्बुद) = नवीन मेघ ।
भावार्थ—श्रीरामजीके चरणारविन्दोंका मकरन्द पान करनेके रसिक भ्रमर
तथा अत्यन्त भाग्यशाली भरतलालकी जय हो ! आप संसारके भूषणस्वरूप सूर्य-
वंशके आभूषण हैं, और राजाओंमें शिरोमणि रामचन्द्रजीके प्रेमी हैं ॥१॥ आपकी
जय हो ! आपने ऐसे सुखप्रद महासाम्राज्यको छोड़ दिया, जो इन्द्र और कुबेर
आदिके लिए भी अत्यन्त दुर्लभ है। आप तलवारकी धारके समान व्रतो महात्मा ओं-
में सर्वश्रेष्ठ समझे जाते हैं, और आपकी शुद्ध बुद्धि-रूपी युवती स्त्री रामरूपी
पतिके प्रेममें तल्लीन है ॥२॥ आपकी जय हो ! आप निष्काम भक्तिभावके वशी-
भूत हृदयसे प्रिय भाई रामचन्द्रके लिए चित्रकूट पर्वतपर पैदल गये, रामजीके
पादुका-रूपी राजाके मंत्री बनकर पृथिवीका पालन करते रहे तथा परमधर्मके
धुरीको धारण करनेवाले एवं बड़े भारी वीर हैं ॥३॥ जय हो ! संजीवनी बूटी
लाते समय संकट आनेपर हनुमान्जीने आपके धनुषबाणकी महिमाका बखान
किया था, आपके बाहुबलकी अधिकता और अतुलित पराक्रमका यही प्रधान
प्रमाण है। आपकी गूढ़गति केवल जानकी-वल्लभ रामजी जानते हैं ॥४॥ आप
युद्ध-स्थानमें गन्धर्वोंका गर्व हरनेवाले तथा फिरसे उन्हें भी रामजीकी गुणावलीके
गायक बनानेवाले हैं। आप महारानी मांडवीके चित्त-चातकके लिए नवीन
मेघवर्ण हैं और शरणागत तुलसीदासको अभयदान देनेवाले हैं। आपकी जय हो !
विशेष
१—'पादुका नृप सचिव'—भरतजी प्रतिदिन श्रीरामजीकी पादुकाका