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विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 56

विनय-पत्रिका ४५
जयति जानकी-सोच-संताप मोचन,
राम-लछमनानंद-वारिज-विकासी ।
कीस-कौतुक-केलि लूम-लंका-दहन,
दलन कानन तरुन तेजरासी ॥४॥
जयति पाथोधि-पाषान-जलजानकर,
जातुधान-प्रचुर-हर्ष-हाता ।
दुष्ट रावन-कुंभकरन-पाकारिजित-
मर्मभित्, कर्म-परिपाक-दाता ॥५॥
जयति भुवनैकभूपन, विभीषन-वरद,
विहित कृत राम-संग्राम साका ।
पुष्पकारूढ़ सौमित्रि-सीता-सहित,
भानु-कुल-भानु-कीरति-पताका ॥६॥
जयति पर-जंत्रमंत्राभिचार-ग्रसन,
कारमन-कूट-कृत्यादि-हंता ।
साकिनी-डाकिनी-पूतना-प्रेत-
बैताल-भूत-प्रमथ-जूथ-जंता ॥७॥
जयति वेदांतविद विविध-विद्या-विसद,
वेद-वेदांगविद ब्रह्मवादी ।
ज्ञान-विज्ञान-वैराग्य-भाजन विभो,
विमल गुन गनसि सुक नारदादी ॥८॥
जयति काल-गुन-कर्म-माया-मथन,
निश्चल ग्यान व्रत-सत्यरत, धर्मचारी ।
सिद्ध-सुरवृंद-जोगींद्र सेवित सदा,
दास तुलसी प्रनत भय-तमारी ॥९॥

शब्दार्थ-मर्कटाधीश = बन्दरोंके राजा । मृगराज = सिंह । कपाली = शिवजी । कोह =
क्रोध । किरनमाली = सूर्य । लसदंजनऽदितिज = (लसत् + अंजना + अदिति + ज) अंजनी-
रूपी अदितिसे जायमान होकर सुशोभित । कोक = चकवा । कोकनद = कमल । हंस = सूर्य ।
बालधि = पूँछ । कुधर = पहाड़ । पयोधि = समुद्र । जातुधान = राक्षस । हाता = हन्ता ।