वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary
भट्ट नारायण द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्लोकानुक्रमणिका २३५
पद्यानि | पृष्ठाङ्काः | पद्यानि | पृष्ठाङ्काः
ध | | प्रत्यक्षं हतबन्धूनां | १८९
धर्मात्मजं प्रति यमौ | ८७ | प्रत्यक्षं हतबान्धवस्य | २१२
धिक्मानुजं कुरुपति | ११२ | प्रयत्नपरिवोधिनः | १३६
धृतराष्ट्रस्य तनयान् | १५ | प्रवृद्धं यद्वैरं मम | १६
धृतायुधो यावदहं | १४८ | प्राप्तावेकरथारूढौ | २२५
न | | प्रालेयमिश्रमकरन्द | ५४
नाहं रक्षो न भूतः | ३१२ | प्रियमनुजमपश्यंस्त | ३११
निर्लज्जस्य दुरोदर | २८१ | प्रभावमृदुस्तिमित- | ७३
निर्वाणवैरदहनाः | ११ | ब |
निर्वैर्यं गुरुशाप | १३८ | बालस्य मे प्रकृति | १६१
निर्वीर्यं वा सवीर्यं वा | २३९ | भ |
निवापाञ्जलिदानेन | ११७ | भग्नं भीमेन भवतो | ८१
निविडोरस्येमिलुलित | १ | भवति तनय लक्ष्मीः | २२१
नूनं तेनाद्य वीरेण | २५० | भवेदक्षीभ्पद्रोणं | १२६
नोच्चैः सत्यपि | ४४ | भीष्मे द्रोणे च निहते | २१६
न्यस्ता न भ्रुकुटिर्न | ७६ | भूमौ क्षिप्तं शरीरं | ३१७
प | | भूमौ निमग्नचक्रः | २२०
पङ्के सैकते वा | २४५ | भूयः परिभवक्लान्ति | ४१
पद्मगहदाणं मंसए | ९२ | भ्रातुस्ते तनयेन | २९८
पञ्चानां मन्यसेऽस्माकं | २६१ | म |
पदे संदिग्ध एवास्मिन् | २७५ | मथ्नामि कौरवशतं | २४
परित्यक्ते देहे रण | १२१ | मदकलितकरेणु | १५९
पर्याप्तनेत्रमचिरोद्गत- | १८९ | मद्वियोगभयात्तातः | ११६
पर्यायेण हि दृश्यन्ते | ६६ | मन्थात्रस्तार्णवाम्भः | ३४
पाञ्चाल्या मन्युवह्निः | २५६ | मम प्राणाधिकं | २१८
पाप प्रियस्तव कथं | १४५ | मम हि वयसा | २९४
पापेन येन हृदयस्थ | २२२ | मया पीतं पीतं न तदनु | ३०४
पितुर्मूर्ध्नि स्पृष्टे | १२४ | मयि जीवति यत्तातः | १३३
पीताभ्यां मद्भुजाभ्यां | २३४ | महाप्रलयमारुत | १००
पूर्यन्तां सलिलेन | २६३ | मातः किमप्यसदृशं | २०२
प्रत्यक्षमरुधनुषां | १२० | मामुद्दिश्य त्यजन् | २१९