वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary
भट्ट नारायण द्वारा
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पट्टेनविन्नांतसंधानतीक्ष्णमोक्षनिक्षिप्तशरधारावर्षिणाभियुक्तः स दुराचारो दुःशासन-
वैरी मध्यमपाण्डवः ।)
उभी-ततस्ततः ।
सुन्दरकः-तदो देव, उहअबलंमिलन्तदीप्पन्तक रितुरअपदादिसमुद्भूद-
धूलिणिअरेण पल्लत्थगजघडासंघादेण अ वित्थन्तेण अन्धआरेण अन्धीकिदं
उहअवलम् । ण हु गगणतलं अवलीअदि । (ततो देव, उभय वलमिलद्दीप्यमान-
करितुरगपदातिसमुद्भूतधूलिनिकरेण पर्यस्तगजघटासंघातेन च विस्तीर्यमाणेनान्धका-
रेणान्धीकृतमुभयवलम् । न खलु गगनतलं लक्ष्यते ।)
उभी - ततस्ततः ।
सुन्दरकः-तदो देव, दूराकट्टिअधणुगुणाच्छोडनटङ्कारेण गम्भीरभी-
सणेण जाणाअदि गज्जिदं पलअजलहरेण त्ति । (ततो देव, दूराकृष्टधनुर्गुणा-
युद्धार्थं लक्ष्मोकृतः, दुराचारः = दुष्टः, मध्यमपाण्डवः = भीमः, कर्णो भीमेन सह
युद्धार्थं सन्नद्ध इत्यर्थः ।
उभयवलमिलद्दीप्यमानकरितुरगपदातिसमुद्भूतधूलिनिकरेण = उभयसैन्ययोः
मिलन्तो ये दीप्यमानहस्तिघोटकचरणगन्तारः तैः समुद्भूतः सञ्जातो यो धूलिनिकरः
रजःसमूहः तेन, पर्यस्तगजघटासङ्घातेन = पर्यस्ता व्याप्ता या गजघटा हस्ति समूहः
तस्याः सङ्घातेन, च विस्तीर्यमाणेने = विततेन, अन्धकारेण = तमसा, उभयवलं=
कौरवपाण्डवसैन्यमन्धीकृतम्, गगनतलम् = आकाशमण्डलम् ।
दूराकृष्टधनुर्गुणाच्छोटनटङ्कारेण = दूरं यथा स्यात्तथा आकृष्टो यो धनुर्गुणः चाप-
आदान और मोक्ष का पता नहीं चलता था । उन्होंने अगणित बाणों की झड़ी लगाते हुए उस
दुष्ट मझले पाण्डव भीमसेन पर आक्रमण कर दिया ।
दोनों-तो फिर क्या हुआ ?
सुन्दरक-तो फिर महाराज ! दोनों पक्षों की सेनाओं के हाथी, घोड़े और पैदल
सैनिकों के भिड़ जाने के कारण उठी हुई धूलराशि में और इधर-उधर फैले हुए हाथियों के
झुण्ड से सर्वत्र विस्तृत अन्धकार से दोनों पक्ष की सेना अन्धी सी हो गई, पृथ्वी और आकाश
का पता नहीं चलता था ।
दोनों-तो फिर ?
सुन्दरक-जब धनुष की प्रत्यञ्चा [ डोरी ] पूरी तरह खींचकर छोड़ दी जाती थी तब
उसकी गम्भीर ध्वनि के कारण त्रासजनक अन्धकार से विदित होता था कि प्रलयकालीन