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सर्वकोश
वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara by Sadananda Yogindra

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 145 में से

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पृष्ठ 15

संस्कृतटीका-भाषाटीकासमेत । ( १५ )
दान्तशास्त्रके वाक्योंमें विश्वास करना श्रद्धा कहाती है॥ १७॥
मुमुक्षुत्वं मोक्षेच्छा ॥ १८ ॥
( भा०टी ) मोक्षमें जो इच्छा होती है उसको
मुमुक्षुत्व कहतेहैं ॥ १८ ॥
एवम्भूतः प्रमाताऽधिकारी । “शान्तो दान्तः”
इत्यादिश्रुतेः॥ तथा चोक्तम्--“प्रशान्तचित्ताय
जितेन्द्रियाय प्रक्षीणदोषाय यथोक्तकारिणे ॥
गुणान्वितायानुगताय सर्वदा प्रदेयमेतत्सकलं
मुमुक्षवे” इति ॥ १९ ॥
( सं०टी० ) तथाच पूर्वोक्तसकलविशेषणविशिष्टः प्रमाता-
धिकारीत्यर्थः।अस्मिन्नर्थे श्रुतिं प्रमाणयति।शांत इति॥१९॥
( भा०टी० ) जो पूर्वोक्त साधनचतुष्टययुक्त होताहै उ-
सी को वेदान्तशास्त्रमें अधिकारी कहते हैं । इस विषयमें श्रु
ति और स्मृतिका प्रमाण दिखाते हैं--“जिसका चित्त शान्त
हो, और जितेन्द्रिय हो,और भ्रम विप्रलिप्सादि दोषरहित,
आज्ञाकारी, गुणवान्, सर्वदा अनुगत,और मोक्षकी इच्छा
करनेवाला हो ऐसे शिष्यको सब विषयका उपदेश करना
चाहिये” ॥ १९ ॥
विषयो जीवब्रह्मैक्यं शुद्धचैतन्यं प्रमेयम् ।
तत्रैव वेदान्तानां तात्पर्यात् ॥ २० ॥
( सं०टी० ) यथोद्देशं विषयं निरूपयति। विषय इति।
अविद्याध्यारोपितसर्वज्ञत्वकिंचिज्ज्ञत्वादिविरुद्धधर्म्मपरित्यागे