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सर्वकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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पृष्ठ 215

' -> 'कथमनुमानमात्रेणार्थनिर्णयः ।'
Yes, 'कथमनुमानमात्रेणार्थनिर्णयः ।'

किञ्च निङ्गातशकेरग्न्यादिद्रव्यस्य मणिमन्त्रौषधादिभिर्विशिष्ट-
Wait, what is that word: 'निङ्गातशकेरग्न्यादिद्रव्यस्य'?
Let's zoom in on that word!
'नि' then what?
Is it 'निर्दग्ध'? 'निराकृत'? 'निर्ज्ञात'?
Look at the characters:
1: नि (ni)
2: र्ज्ञा (r-jñā)?
Wait! 'र्' on top? Yes, a repha!
And underneath is 'ज्ञा' (jñā)!
3: त (ta)!
निर्ज्ञात! (nirjñāta = known, ascertained!)
4: श (śa)
5: क्ते (kte)
6: र (ra with repha? No, र् + अ = र)
निर्ज्ञातशक्तेरग्न्यादिद्रव्यस्य!
निर्ज्ञातशक्तेः + अग्न्यादिद्रव्यस्य = निर्ज्ञातशक्तेरग्न्यादिद्रव्यस्य!
Wow, absolutely clear: निर्ज्ञातशक्तेरग्न्यादिद्रव्यस्य!

Line 8 continued:
मणिमन्त्रौषधादिभिर्विशिष्ट-
सम्बन्धैः सा शक्तिः प्रतिबद्ध्यते । तथा