वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)
Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 210, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंline 21:
Line 20: '...धर्माय भवति । यथार्थानृत'
Wait, line 20 end has: 'यथार्थानृत' - wait, is there a hyphen? It's just 'यथार्थानृत'.
Line 21: 'मन्यथाऽवस्थितस्यान्यथावचनम् प्रत्यवायाय तथा शब्दानृतमरूपं वाच-')
Wait, let's look at line 21:
'मन्यथाऽवस्थितस्यान्यथावचनम्'?
Look at the characters:
'म' 'न्य' 'था' 'व' 'स्थि' 'त' 'स्या' 'न्य' 'था' 'व' 'च' 'न' 'म्'
There is an avagraha? 'मन्यथाऽवस्थित...' or 'मन्यथावस्थित...'?
Looks like 'मन्यथाऽवस्थितस्यान्यथावचनम्'.
Wait, before it: 'यथार्थानृत'? No, 'यथा ह्यनृत-'?
Look at line 20 end:
य - थ - ा - र्था - नृ - त:
Is that 'यथार्थानृत'? Or 'यथा ह्यनृत-'?
Let's zoom in on line 20 end:
'य' 'था' 'र्था' - wait, is there a repha?
'यथा ह्य