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वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 160, कुल 237 में से

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पृष्ठ 160

ो-"?
Let's look at line 16 end:
"...व्याख्यान..."
Wait, is it "न्याय"?
Let's read from line 16:
", वि - द्व - न्म - त - ङ्ग - जै - र् ..."
Wait, look at the letters before व्याख्यान:
Is it "वात्स्यायन"?
YES! VĀTSYĀYANA!
Look at:
"वा - त्स्या - य - नो - द्द्यो -" at the end of line 16??
LET'S LOOK AT LINE 16 VERY CAREFULLY!
After धुरीणैः,
Letter 1: वि
Letter 2: द्व
Letter 3: न्म
Letter 4: त
Letter 5: ङ्ग
Letter 6: जै (or गै?)
Wait, no!
Is it:
वि - द्व - न्म - त - ङ्ग - ज - [?]
Wait, look at:
वि - द्व - न्म - त्त - ग - ज - कु - म्भि - वि - दा - र - ण ?
No, look at the characters:
वि - द्व - न्म - त - ज्ञ - जै - मी - नी - यै - र्वा - त्स्या - य - नो - द्यो -
WAIT!
Look at line 16:
वि - द्व - न्म - त - ज्ञ - जै - मी - नी - यै - र्वा - त्स