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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

७. औपनिषदिक अधिकरण २०३
शास्त्रसम्मत ग्रन्थ—बाभ्रवीय सूत्रों को समझकर और कामशास्त्र का गुरुओं से
अध्ययन कर एवं स्वबुद्धि से चिन्तन मनन करके ही आचार्य वात्स्यायन ने इस 'कामसूत्र' को
शास्त्रीय विधि से लिखा है ॥ ५६ ॥
तदेतद् ब्रह्मचर्येण परेण च समाधिना।
विहितं लोकयात्रार्थं न रागार्थोऽस्य संविधिः ॥ ५७ ॥
निर्माण की अवस्था और प्रयोजन—इस 'कामसूत्र' की रचना अमोघ ब्रह्मचर्य और
निर्विकल्प समाधि द्वारा महर्षि वात्स्यायन ने लोकव्यवहार को सुचारु रूप से चलाने के लिये की
है, इसका विधान राग के निमित्त नहीं किया गया ॥ ५७ ॥
रक्षन् धर्मार्थकामानां स्थितिं स्वां लोकवर्तिनीम्।
अस्य शास्त्रस्य तत्त्वज्ञो भवत्येव जितेन्द्रियः ॥ ५८ ॥
कामतत्त्वज्ञ कामुक नहीं होता—इस शास्त्र के तत्त्व को समझने वाला पुरुष धर्म, अर्थ
एवं काम तथा लोक में अपनी स्थिति की रक्षा करता हुआ निश्चय ही जितेन्द्रिय हो जाता
है ॥ ५८ ॥
तदेतत्कुशलो विद्वान् धर्मार्थाववलोकयन्।
नातिरागात्मकः कामी प्रयुञ्जानः प्रसिध्यति ॥ ५९ ॥
सिद्धि के लिये रागात्मकता का अभाव आवश्यक—जो कामी पुरुष रागात्मक भाव
से इस शास्त्र का अध्ययन एवं प्रयोग करता है, उसे कदापि सिद्धि नहीं मिलती; किन्तु जो
विवेकवान् पुरुष धर्म और अर्थ को दृष्टि में रखकर इसका प्रयोग करता है उसे पूर्ण सिद्धि
मिलती है ॥ ५९ ॥
नष्टरागप्रत्यानयन से चित्रयोग तक
व्याख्यानात्मक द्वितीय अध्याय पूर्ण ॥
॥ वात्स्यायनकृत कामसूत्र पूर्ण ॥
काम० १५

साम्प्रयोगिक आसनों के
कतिपय चित्र
[इस ग्रन्थ के द्वितीय साम्प्रयोगिक अधिकरण की षष्ठ, अष्टम एवं नवम अध्यायों
में नायक-नायिका द्वारा साम्प्रयोगिकावस्था (सम्भोगावस्था) में प्रयुक्त किये जाने वाले
सभी आसनों का विस्तृत वर्णन उपलब्ध है।
पाठकों को इन का सरलतापूर्वक ज्ञान हो जाय—इस आशा से यहाँ कुछ आसनों
के चित्र दिये जा रहे हैं।
प्रत्येक चित्र पर आसन का नाम तथा इस ग्रन्थ की पृष्ठ-संख्या दे दी गयी है।
तत्सम्बद्ध विस्तृत विवरण उस उस पृष्ठ पर देखना चाहिये।]

आसन-चित्र २०५
मृगी आसन
विवरण पृष्ठ ५२
हस्तिनी आसन
विवरण पृष्ठ ५२
इन्द्राणी आसन
विवरण पृष्ठ ५३
वाडवक आसन
विवरण पृष्ठ ५३, ५४

२०६ वात्स्यायन-कामसूत्र
उत्फुल्लक आसन
विवरण पृष्ठ ५३
उत्तानसम्पुटक आसन
विवरण पृष्ठ ५४
उत्तानसम्पुटक आसन
विवरण पृष्ठ ५४
पार्श्व सम्पुटक आसन
विवरण पृष्ठ ५४
पीडितक आसन
विवरण पृष्ठ ५४

आसन-चित्र २०७
अर्धपीडितक आसन
विवरण पृष्ठ ५४,५५
वेष्टितक आसन
विवरण पृष्ठ ५४
वेष्टितक आसन
विवरण पृष्ठ ५४

२०८ वात्स्यायन-कामसूत्र
भुग्नक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
भुग्नक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
कार्कटकासन
विवरण पृष्ठ ५५

आसन-चित्र
२०९
उत्पीड़ितक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
वेणुदारितक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
भुग्नक आसन
विवरण पृष्ठ ५५

२१० वात्स्यायन-कामसूत्र
वेणुदारितक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
पद्मासन
विवरण पृष्ठ ५५
परावृत्तक आसन
विवरण पृष्ठ ५५

आसन-चित्र २११
परावृत्तक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
जलसम्भोगासन
विवरण पृष्ठ ५६
स्थितरत आसन
विवरण पृष्ठ ५६
धेनुक आसन
विवरण पृष्ठ ५६

२१२ वात्स्यायन-कामसूत्र
कार्कटक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
परावृत्तक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
धेनुक आसन
विवरण पृष्ठ ५६
अवलम्बितक आसन
विवरण पृष्ठ ५६

आसन-चित्र २१३
शौन आसन
विवरण पृष्ठ ५६
ऐणेय आसन
विवरण पृष्ठ ५६
ऐणेय आसन
विवरण पृष्ठ ५६
सङ्घाटक आसन
विवरण पृष्ठ ५७
मार्जारललितक आसन
विवरण पृष्ठ ५६
सङ्घाटक आसन
विवरण पृष्ठ ५७

२१४ वात्स्यायन-कामसूत्र
व्याघ्रावस्कन्द आसन
विवरण पृष्ठ ५६
गोयूथिक आसन
विवरण पृष्ठ ५७
पुरुषायित आसन
विवरण पृष्ठ ००
पुरुषायित आसन
विवरण पृष्ठ ००

आसन-चित्र २१५
वारिक्रीडितक आसन
विवरण पृष्ठ ५७
पुरुषायित आसन
विवरण पृष्ठ ६३
पुरुषायित आसन
विवरण पृष्ठ ६३
पुरुषायित आसन
विवरण पृष्ठ ६३

२१६ वात्स्यायन-कामसूत्र
मन्थन आसन
विवरण पृष्ठ ६५
अपद्रव्य
विवरण पृष्ठ १९८
औपरिष्टकासन (मुखमैथुन)
विवरण पृष्ठ ६८

आसन-चित्र २१७
अवमर्दनासन
विवरण पृष्ठ ५६
कच्छपासन
विवरण पृष्ठ ५६
गजोपमर्दितासन
विवरण पृष्ठ ५६
उत्पीड़ितक आसन
विवरण पृष्ठ ५५
स्थितरत आसन
विवरण पृष्ठ ५६

२१८ वात्स्यायन-कामसूत्र
प्रेङ्खोलित आसन
विवरण पृष्ठ ६६
औपरिष्टकासन
विवरण पृष्ठ ६८
उपसृप्तक आसन
विवरण पृष्ठ ६५
कार्कटक आसन
विवरण पृष्ठ ५५

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श्रीमाहेश्वरतन्त्रम् (अपौरुषेयम् नारदपाञ्चरात्रान्तर्गतम्। 'सरला' हिन्दी व्याख्योपेतम्।
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