वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंेत".
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है ।५ आचार्य वाचस्पति मिश्र कहते हैं कि 'तज्जपस्तदर्थभावनम्' में 'तत्' का अर्थ
Wait, footnote marker '५' after "है ।".
"है ।५ आचार्य वाचस्पति मिश्र कहते हैं कि 'तज्जपस्तदर्थभावनम्' में 'तत्' का अर्थ"
Line 27:
है—'तस्य प्रणवस्य'६ अर्थात् 'प्रणव का' । 'भावनं' का अर्थ है—'भावनं पुनः
Wait, footnote marker '६' after प्रणवस्य': "प्रणवस्य'६".
"है—'तस्य प्रणवस्य'६ अर्थात् 'प्रणव का' । 'भावनं' का अर्थ है—'भावनं पुनः"
Line 28:
पुनर्निश्चन्ते निवेशनम्' अर्थात् बार-बार चित्त में निवेशन ।७ प्रणव के जप के साथ
Wait, look at: "पुनर्निश्चन्ते" or "पुनर्निश्चेते"?
Let's zoom in on line 28:
"पु न र्नि श्च न्ते" or "पु न र्नि श्च े ते" or "पुनश्चित्ते"?
Wait! Let's examine the Sanskrit phrase:
In Vacaspati Mishra's Tattvavaisharadi on YS 1.28: