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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 301, कुल 530 में से

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प्रथमोऽंशः १९९
तन्त्रों एवं हठयौगिक ग्रन्थों में—'बिन्दु' शब्द के अर्थ में—रसना, सूर्य, रवि, प्राण,
शमन, काली, यमुना, रज, पुरुष, नाद, व्यञ्जन शब्दों का, 'नाद' शब्द के अर्थ
में—ललना, चन्द्रा, शशि, अपानु, धमन, अली, गङ्गा, शुक्रा, तमस्, अभाव,
प्रकृति, ग्राहक एवं स्वर शब्दों का प्रयोग मिलता है ।¹
'ध्यानबिन्दूपनिषद्' आदि में—'हठयोग प्रदीपिका' में नाद बिन्दु का प्रयोग—
'नाद' = परब्रह्म + अनाहत नाद ।। 'बिन्दु' = जीवात्मा + वीर्य ।।
(४।७२;४।१०५)
तन्त्र मन्त्र के अनुसार शिव-शक्ति का प्रथम विकास 'नाद' के रूप में मिलता
है ।² शिव-शक्ति का संयोग एवं उन दोनों का पारस्परिक संबंध नाद है ।³ 'नाद'
क्रिया रूप है । तात्विक क्षेत्र का सदाख्य तत्त्व ही मन्त्र क्षेत्र में—'नाद' है ।⁴
अतंरात्मा 'नाद' के रूप में प्रस्फुटित होती है वही जीवों में प्राणवायु से पैंरित
होकर अक्षरों का रूप धारण कर लेती है ।⁵
प्रशान्तविषुवमाह—
रेफे कामकलार्णे हार्दकलायां च बिन्दादौ ।
नादान्तावधि नादः सूक्ष्मतरो जायते तत्र ॥ ४७ ॥
शक्तेर्मध्ये तल्लयचिन्तनमुदितं प्रशान्तविषुवाख्यम् ।
(प्रशान्तविषुव' का स्वरूप)
रेफ में कामकला (ई) एवं बिन्द्वारब्ध तथा ह्रीं के नादान्त में समाप्त (अवयवों
में) एक सूक्ष्मतर 'नाद' उत्पन्न होता है । वहाँ इस सूक्ष्मनाद की शक्ति में लय होने
के चिन्तन का नाम 'प्रशान्तविषुव' है ।। ४७, ४७- ।।

  • प्रकाश *
    तृतीयकूटस्थरेफादिषु सप्तसु स्थानेष्वाधारादारभ्यस्य नादस्य तत्र सूक्ष्मतरता-
    दशा, अभिघातादुत्तरोत्तरक्षणेषु कांस्यतालध्वनिवत् । तस्य शक्तौ लयो भाव्य
    इत्यर्थः ॥ ४७, ४७- ॥
  • सरोजिनी *
    'प्रशान्त विषुव'—नादान्त पर्यन्त मन्त्रावयवों की शक्ति से लय भावना
    'प्रशान्तविषुव' है ।⁶

१. इन्ट्रोडक्शन टू तान्त्रिक बुद्धिज्म
२. तन्त्राज़—देयर फिलासफी एण्ड आकल्ट सीक्रेट्स
३. भास्कराचार्य—'वरिवस्यारहस्यम्'
४. गारलैण्ड्ज़ आफ लेटर्स—आर्थर एवेलॉन
५. प्रयोगसार ६. योगिनीहृदय