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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 224, कुल 530 में से

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पृष्ठ 224

१२२ वरिवस्यारहस्ये
प्रथमेऽष्टादश वर्णा द्वाविंशतिरक्षराणि मध्ये स्युः ।
प्रथमेन तुल्यमन्त्यं सङ्घातेनाष्टपञ्चाशत् ॥ १४ ॥
(कूटत्रय में वर्ण संख्या)
प्रथम कूट (वाग्भव कूट) में अठारह एवं मध्य कूट (कामराज कूट) में बाईस
वर्ण हैं । अन्तिम कूट (शक्तिकूट) में प्रथम के समान (अर्थात् अठारह वर्ण) हैं
(और इस प्रकार) सब मिलाकर अट्ठावन वर्ण होते हैं ॥ १४ ॥

  • सरोजिनी *
    'मन्त्र' (पञ्चदशाक्षरी मन्त्र)
    ┌────────────────────────┼────────────────────────┐
    'वाग्भवकूट' 'कामराजकूट' 'शक्तिकूट' (श्रीकूट)
    (१८ वर्ण) (२२ वर्ण) (१८ वर्ण) = ५८ वर्ण
    ('क ए ई ल ह्रीं') ('ह स क ह ल ह्रीं') ('स क ल ह्रीं')
कूटमन्त्राक्षरमन्त्राक्षर संख्याह्रीं के अवयवमहायोग
(१) 'वाग्भव कूट'क् + अ, ए, ई,<br>(१) (१) (१) (१)<br>ल् + अ<br>(१) (१)६१२१८
(२) 'कामराजकूट'ह् + अ, स् + अ,<br>(१) (१) (१) (१)<br>क् + अ, ह् + अ,<br>(१) (१) (१) (१)<br>ल् + अ<br>(१) (१)१०१२२२
(३) 'शक्ति कूट'स् + अ, क् + अ,<br>(१) (१) (१) (१)<br>ल + अ<br>(१) (१)६१२१८
<td colspan="3">पञ्चदशाक्षरी मन्त्र के<br>समस्त वर्णों की<br>संख्या = ५८</td>
महायोग२२ वर्ण२२३६५८