वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished530 पृष्ठ
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१२२ वरिवस्यारहस्ये
प्रथमेऽष्टादश वर्णा द्वाविंशतिरक्षराणि मध्ये स्युः ।
प्रथमेन तुल्यमन्त्यं सङ्घातेनाष्टपञ्चाशत् ॥ १४ ॥
(कूटत्रय में वर्ण संख्या)
प्रथम कूट (वाग्भव कूट) में अठारह एवं मध्य कूट (कामराज कूट) में बाईस
वर्ण हैं । अन्तिम कूट (शक्तिकूट) में प्रथम के समान (अर्थात् अठारह वर्ण) हैं
(और इस प्रकार) सब मिलाकर अट्ठावन वर्ण होते हैं ॥ १४ ॥
- सरोजिनी *
'मन्त्र' (पञ्चदशाक्षरी मन्त्र)
┌────────────────────────┼────────────────────────┐
'वाग्भवकूट' 'कामराजकूट' 'शक्तिकूट' (श्रीकूट)
(१८ वर्ण) (२२ वर्ण) (१८ वर्ण) = ५८ वर्ण
('क ए ई ल ह्रीं') ('ह स क ह ल ह्रीं') ('स क ल ह्रीं')
| कूट | मन्त्राक्षर | मन्त्राक्षर संख्या | ह्रीं के अवयव | महायोग |
|---|---|---|---|---|
| (१) 'वाग्भव कूट' | क् + अ, ए, ई,<br>(१) (१) (१) (१)<br>ल् + अ<br>(१) (१) | ६ | १२ | १८ |
| (२) 'कामराजकूट' | ह् + अ, स् + अ,<br>(१) (१) (१) (१)<br>क् + अ, ह् + अ,<br>(१) (१) (१) (१)<br>ल् + अ<br>(१) (१) | १० | १२ | २२ |
| (३) 'शक्ति कूट' | स् + अ, क् + अ,<br>(१) (१) (१) (१)<br>ल + अ<br>(१) (१) | ६ | १२ | १८ |
| <td colspan="3">पञ्चदशाक्षरी मन्त्र के<br>समस्त वर्णों की<br>संख्या = ५८</td> | ||||
| महायोग | २२ वर्ण | २२ | ३६ | ५८ |