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वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 530 में से

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३६ वरिवस्यारहस्ये
अर्थमयी सृष्टि अर्थमयी है । ३६ तत्त्व ही मूल अर्थ हैं और समस्त जगत्
इन्हीं अर्थों का विकसित एवं विराट् रूप है ।
३६ तत्त्व निम्नांकित है—

वर्गकलातत्त्वभुवन संख्याभुवनों के नाम
(अ) शुद्ध तत्त्व१. शान्त्यतीता कला(क) शुद्धतत्त्व<br>१. शिव१०अनाश्रित, अनाथ, अनन्त, व्योम-रूपिणी, व्यापिनी, ऊर्ध्वगामिनी, मोचिका, रोचिका, दीपिका, इन्धिका । (इनमें ५ शाक्त भुवन हैं । ५ नादोर्ध्व भुवन हैं ।)
२. शक्ति०५शान्त्यतीता, शान्ति, विद्या, प्रतिष्ठा, निवृत्ति । ये बैन्दवपुर कहलाते हैं ।
१५
२. शान्ति कलाशुद्ध तत्त्व<br>३. सदाशिव तत्त्व०१सदाशिव भुवन ।
४. ईश्वरतत्त्व०८शिखण्डी, श्रीकण्ठ, त्रिमूर्ति, एक नेत्र, एक रुद्र, शिवोत्तम, सूक्ष्म, अनन्त ॥
५. शुद्ध विद्यातत्त्व०९मनोन्मनी, सर्वभूतदमनी, बल-प्रमथिनी, बलविकरणी, कल-विकरणी, काली, रौद्री, ज्येष्ठा, वामा ॥
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(आ) शुद्धाशुद्ध तत्त्व३. विद्या कला(ख) शुद्धाशुद्ध तत्त्व<br>६. माया०८अङ्गुष्ठ मात्र, ईशान, एकेक्षण, एक पिङ्गल, उद्भव, भव, वामदेव, महाधुति ।
७. काल०२शिखेश, एकवीर ।
८. कला०२पञ्चान्तक, शूर ।
९. विद्या०२पिङ्ग, ज्योति ।
१०. नियति०२संवर्त, क्रोध ।
११. राग०५एकशिव, अनन्त, अज, उमापति, प्रचण्ड ।