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सर्वकोश
वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

Vapi Kupa Tadaga Pratishtha Paddhati

प्राचीन भारतीय जल-स्थापत्य परम्परा द्वारा

DevanagariSanskritpublished30 पृष्ठ

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रात्रिं नो बध्यो रामो वारू। तौ मोदौ रुश्या मो नामा ७ सौम्या या मौ
श्वेत म्र्न कर्दम श्च पार्थिवौ रुश्या वौ लोमश स्तयो का यद्यः श्वेता पु
र्छेंद्राय श्वदश्वाध्वै श्वद्वैश्रवणौ वानमः २॥ दक्षिणदिशि यज्ञस्य
ध्वजा नाम सुभद्रिका च केरु सा तु सा देवी वारा हि वडू मंग
लारक्षौ चैवतु यज्ञस्य मवा तत्र विमोहिता यमायत्वेति मंत्रे
ण याम्यां दिशि संस्थितम् ॐ यमायत्वेति मंत्रेण ऽप्यावाह नम्
नैऋत्यां दिशि यज्ञस्य नीलवर्ण ध्वजा स्मृता नीलोत्पल दल
श्यामानिर्मिता सावज्रनिर्णैरक्षा चैवतु यज्ञस्य मधा तत्र विमो
हिता नीरषते निरतेति मंत्रेण नैऋत्यां दिशि संस्थितम् ॐ
एष ते निरृते भग संद्वषः स्वाहा ऽग्निनेत्रेभ्यो देवेभ्यः उ
रसङ्घः स्वाहा यमनेत्रेभ्यो देवेभ्यः दक्षिण सङ्घः स्वाहा विश्वे
देवेभ्यो नेत्रेभ्यो देवेभ्य पश्चा सङ्घः स्वाहा मित्रवरुण नेत्रेभ्यो
देवेभ्यो उत्तरसङ्घः स्वाहा ४ पश्चिमायां दिशि यज्ञस्य शुक्लव
र्ण ध्वजा स्मृता शुक्ल स्फटिक संका सैर्निर्मिता विश्वकर्मण रक्ष-