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सर्वकोश
वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

Vapi Kupa Tadaga Pratishtha Paddhati

प्राचीन भारतीय जल-स्थापत्य परम्परा द्वारा

DevanagariSanskritpublished30 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

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[शीर्षक/ऊपरी हाशिए का पाठ] ... शि० ग्रु० ८ जलाशयनाम संस्कारः ...

एवं कलशस्थापनं तत्र ग्रहशांतिकृत्वा नैऋते वास्तुदेवतास्था-
पनं तत्र वास्तुशांतिकृत्वा सर्वतोभद्रमंडपं विरच्य तन्म-
ध्ये ताम्रपात्रे जलचराणांस्थापनम् ॥ तत्र सौवर्णी रौप्य-
मयी लक्ष्मीनारायणप्रतिमा सवस्त्रां स्थापयेत् ॥ प्रणुता-
रणं कृत्वा धिष्ण्य सत्वेति ॥ ॐ हिमंसवाञ्जरायुणाग्ने परिव्य-
यामसि वावकोऽस्मभ्यं शिवो भव ॥ १ ॥ पंचामृतेन स्ना-
नं ॥ सुवर्णकूर्ममकरौ रजतौ मत्स्यदुंदुभौ ताम्रौ कुलीर-
मंडूकौ [कांस्यौ शिशु]मारकौ ॥ १ ॥ ततो यजमानांगुष्ठ-
रत्निपरिमितं यजमानप्रमाणं वा ॰ प्रथमोक्षादि द्विरद-
दांताणां ॰ पृष्ठां पृथिव्युपरिवर्तुलं मध्ये संततं ऋजुं वा उत्तर-
स्यांदिशि षोडशहस्तं यूपं स्थापयेत् यूपनामांशंभे काष्ठैः
सर्वेषां प्रतिष्ठापूजनं पूर्वेण ततो मः ॰ प्राज्यभागौ हु-
त्वा ॰ प्राज्यं संस्कृज्य ॥ ततोऽग्निमंत्रान्वहेत् ॥ ॐ तन्नोऽग्ने ॰ ॥