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सर्वकोश
वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

Vapi Kupa Tadaga Pratishtha Paddhati

प्राचीन भारतीय जल-स्थापत्य परम्परा द्वारा

DevanagariSanskritpublished30 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

ॐ स त्वं नो ऽग्नये ॥ ॐ इमं मे वरुण ॥ ॐ तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वंदमा
नादाशास्ते ऽ प्रहेडमानो वरुण ह बोध्युरुशंस मान आयुः प्रमो
षीः ॥ ॐ ये ते शतं ॥ ॐ अयाश्चाग्ने ऽ ॐ उदुत्तमं ॥ ॐ उरु ष्यं
णिरा वरु ॐ आकार हृदी पपं या मन्यवे तं वा ऽव देवा दप्रति
धानवे करुनोपवक्ता हृद्वा विप्रो प्रिता ॥ ॐ वरुणस्योतं
इति ॥ ॐ प्रचेतसे त्र्यृचं हुत्वा ॥ ततः स्थालीपाकस्य
जुहोति ॥ ॐ अग्नये स्वाहा ॐ सोमाय स्वाहा ॐ यमाय
स्वाहा ॐ वरुणाय स्वाहा ॐ भीमाय स्वाहा ॐ उग्राय स्वा
हा ॐ शतक्रतवे स्वाहा ॐ बुधैः स्वाहा ॐ स्वर्गाय स्वाहा
ततः प्रधानमंत्रैर्जुहोति ॐ तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वंदमान
दाशास्ते त्वन्नो ऽग्न सुप्रहेड मानो ह वो ध्युरुशंस मान
आयुः प्रमोषी