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वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

Vapi Kupa Tadaga Pratishtha Paddhati

प्राचीन भारतीय जल-स्थापत्य परम्परा द्वारा

DevanagariSanskritpublished30 पृष्ठ

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पृष्ठ 1

सुवर्ण की मूर्ति विष्णु की
१ लक्ष्मीजी की रजत की १. ध्वजा १० पताका करनी || पतन नाम स्थान काहू ||
पंचामृतेन स्नानम्

Acc. 212
१
उसर्ग नाम त्याग काहू

[Boxed Text]
अथ वापी कूप तडागाद्युद्या
न पुष्करिणी जलोत्सर्गः ॥
सम्वत् १८४८ ॥ मुक्तहस्ते दमू

[Upper Right Column]
वापी की हवन पद्धती से
उसर्ग पद्धती से
और तड़ाग की
हवन पद्धती से
वास्तु शांति से और
उसर्ग पद्धती से
[कटा हुआ पाठ]
कूप प्रती
ष्टा करावनी

[Far Right Margin]
पत
का
तौवे
का
२ नि
वसा
शोला
त्रि-
तोक =
५ सु
टिशु
तकी
घाल
कर
नी

[Left Section]
न और
मंकू प्रवर नाम !
रूप नोनाकू काहे ।
छूकर
चांदी के मस्य
ताम्र के मण्डूक
मिडक करने
प्रष्णान सुवर्ण
के करने नाव चरन ।

[Middle Section below the Box]
बाग प्रतीष्टा वी करावनी
गंगाराम प्रतिमानी करावनी
पंचामृत
तीर्थों का जल
पंचगव्य
९ कूपों का जल
पमनाज
लसर
खतीज

[Bottom Line]
का शङ्के इत्य स्पृष्टंकूपः कुर्वन्ति मेडूकाः १
स्नान्ति... इतिकूपः