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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 835 में से

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पृष्ठ 73

" - no, "सामर्थ्यादवगन्तव्यमिति"
then: "ना"
then: "म्-" or "म-"?
And line 32 begins with:
"र्भाणां"? "र्माणाम्"?
Wait, could it be "आमानां"? No, the first letter of L32 has a repha?
Wait! Look at L32:
First letter: looks like 'र्' on top of 'मा'?
Wait, could it be 'श'?
Look at L32: "श्मा"? No.
Let's look at the context of line 31-32:
"प्रत्ययः ॥ ३।१।१ ॥ आपञ्चमपरिसमाप्तेरधिकारोयम् ॥"
Footnote 9:
"९ स्वस्वप्रकृत्यन्यतरार्थप्रत्यायकत्वमेव प्रत्ययत्वं महासंज्ञाकरणसामर्थ्यादवगन्तव्यमिति..."
If it is an अधिकार (governing rule), why is it called a महासंज्ञा?
"महासंज्ञाकरणसामर्थ्यात् ... प्रत्ययत्वं ... अवगन्तव्यमिति"
Then: "ना-" at end of L31?
Wait! Is it "नाना-"?
Look at L31 end: 'ना' 'म' - wait, is that a hyphen?
Let's look at other lines:
L6 end: वर्जयि-
L7 end: कृत्तद्धिता-