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वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 640, कुल 835 में से

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पृष्ठ 640

कयोः
154: कास्तीराजस्तुन्दे नगरे
155: कारस्करो वृक्षः
156: पारस्करप्रभृतीनि च संज्ञायाम्
157: अनुदात्तं पदमेकवर्जम्
158: कर्षात्वतो घञोऽन्त उदात्तः
159: उञ्छादीनां च
160: अनुदात्तस्य च यत्रोदात्तलोपः

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152 is प्रस्कण्वहरिश्चन्द्रावृषी!
153 is मस्करमस्करिणौ वेणुपरिव्राजकयोः!
154 is कास्तीराजस्तुन्दे नगरे!
155 is कारस्करो वृक्षः!
156 is पारस्करप्रभृतीनि च संज्ञायाम्!
157 is अनुदात्तं पदमेकवर्जम्!
158 is कर्षात्वतो घञोऽन्त उदात्तः!
159 is उञ्छादीनां च!
160 is अनुदात्तस्य च यत्रोदात्तलोपः!

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"॥ १५२ ॥ प्रस्कण्वहरिश्चन्द्रावृषी ॥ १५३ ॥ मस्करमस्करिणौ वेणु..."
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