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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 639, कुल 835 में से

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पृष्ठ 639

पररूपम् ॥ ९४ ॥ ओमाङोश्च ॥ ९५ ॥ उस्यपदान्तात् ॥ ९६ ॥ अतो गुणे

Line 30:
॥ ९७ ॥ अव्यक्तानुकरणस्यात इतौ ॥ ९८ ॥ नाम्रेडितस्यान्त्यस्य तु वा ॥ ९९ ॥
At the very bottom:
३

Let's double check line numbers and all sutras to be completely faithful.

Let's re-read line 20:
"शस्यूषन्दोषन्द्" then gap with handwritten "यकञ्छकन्नुदञ्" ... "कञ्छकन्नुदञ्छस्प्रभृतिषु ॥ ६३ ॥ वात्वादेः षः सः ॥ ६४ ॥ णो नः ॥"
Let's transcribe what is visible:
शस्यूषन्दोषन्द् यकञ्छकन्नुदञ्छस्प्रभृतिषु ॥ ६३ ॥ वात्वादेः षः सः ॥ ६४ ॥ णो नः ॥

Line 18:
स्मयतेः ॥ ५७ ॥ वाणौचिनि दृशोर्ह्वल्यमकिति ॥ ५८ ॥ अनुदात्तस्य चर्दुपधस्यान्यतरस्याम् ॥ ५९ ॥

Line 19:
`शोर्वीरंछन्दसि छ्व्योः ॥ ६ ॥ ॥ ये च तद्धिते ॥ ६१ ॥ अचि शीर्षः ॥ ६२ ॥ पद्