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सर्वकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 160 में से

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पृष्ठ 132

१९८ | वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद

३१०-द्रव्यत्वगुणत्वप्रतिषेधोभावेन व्याख्यातः ॥ २६ ॥
(द्रव्यत्वगुणत्वप्रतिषेधः) द्रव्यत्व और गुणत्व का प्रतिषेध (भावेन)
भाव के साथ (व्याख्यातः) व्याख्यात हो चुका ॥
अर्थात् ३९ और ४० वें सूत्रों में जिस प्रकार सत्ता को गुण और कर्म से
भिन्न सिद्ध कर आये हैं, इसी प्रकार यहां भी समवाय को द्रव्य और गुण से
भिन्न समझना चाहिये ॥ २६ ॥
प्रश्न-तो क्या समवाय में केवल द्रव्यत्व और गुणत्व का निषेध ही सत्ता
के साथ कहा गया ? अन्य कुछ नहीं ? उत्तर-
३११-तत्त्वञ्च ॥ २७ ॥
(तत्त्वम्) एकत्व और नित्यत्व (च) भी [कहा गया है] ॥
अर्थात् जिस प्रकार सत्ता एक और नित्य है, इसी प्रकार समवाय भी एक
और नित्य है ॥ २७ ॥
इस आह्निक में संख्यादि ५ गुणों और समवाय सम्बन्ध की तथा शब्द
और अर्थ में क्या सम्बन्ध है, इस की परीक्षा की गयी ॥
इति सप्तमाध्यायस्य द्वितीयमाह्निकम्
॥ २ ॥
इति श्री तुलसीरामस्वामिकृते वैशेषिकदर्शनभाषानुवादे
गुणसमवायाध्यायः सप्तमः ॥ ७ ॥