वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya
महर्षि कणाद द्वारा
स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)
पृष्ठ 122, कुल 160 में से
संदर्भ में पढ़ें११८ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद
२७३—अणुत्वमहत्त्वयोरणुत्वमहत्त्वा-
ऽभावः कर्मगुणैर्व्याख्यातः ॥ १४ ॥
(अणुत्वमहत्त्वयोः) छोटेपन और बड़ेपन का (अणुत्वमहत्त्वाभावः)
अन्य छोटापन और बड़ापन नहीं होता, यह बात (कर्मगुणैः) कर्म और
गुणों के व्याख्यान से (व्याख्यातः) कही गई ॥
कर्मों और गुणों के व्याख्यान में कह चुके हैं (देखो सूत्र १६ और १७
अध्याय १ आह्निक १) कि कर्म का कर्म और गुण का गुण नहीं होता,
इसी प्रकार समझना चाहिये कि छोटेपन का छोटापन और बड़ेपन का
बड़ापन भी अन्य नहीं होता ॥ १४ ॥
इसी बात को अगले सूत्र में भिन्न-२ करके समझाते हैं कि:-
२७४-कर्मभिः कर्माणि गुणैश्च गुणा व्याख्याताः ॥ १५ ॥
(कर्मभिः) उत्क्षेपणादि विशिष्ट कर्मों से (कर्माणि) कर्म (च) और
(गुणैः) रूपादि विशिष्ट गुणों से (गुणाः) गुण (व्याख्याताः) व्याख्यात
हो चुके ॥ १५ ॥ तथा:-
२७५-अणुत्वमहत्त्वाभ्यां कर्मगुणाश्च ॥ १६ ॥
(अणुत्वमहत्त्वाभ्याम्) अणुत्व और महत्त्व के व्याख्यान से (कर्मगुणाः)
कर्म और गुण (च) भी व्याख्यात समझो ॥
जिस प्रकार अणुत्व का अणुत्व नहीं होता और जैसे महत्त्व का महत्त्व
नहीं होता, इसी प्रकार कर्मों का अणुत्व और महत्त्व तथा गुणों का अणुत्व
और महत्त्व भी नहीं बनता ॥ १६ ॥ और-
२७६-एतेन दीर्घत्वह्रस्वत्वे व्याख्याते ॥ १७ ॥
(एतेन) इस से (दीर्घत्वह्रस्वत्वे) दीर्घता और ह्रस्वता (व्याख्याते)
व्याख्यात समझो ॥
जिस प्रकार अणुत्व का अणुत्व और महत्त्व का महत्त्व नहीं बनता,
इसी प्रकार दीर्घत्व का दीर्घत्व और ह्रस्वत्व का ह्रस्वत्व भी नहीं बनता ॥ १७ ॥
प्रश्न-१-अणुत्व, २-महत्त्व, ३-दीर्घत्व, ४-ह्रस्वत्व, ये चारों परिमाण
नित्य हैं वा अनित्य ? उत्तर-.