सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

पृष्ठ 109, कुल 160 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 109

पञ्चमोऽध्याय २ आन्हिक १०५
अर्थात् मन का एक देह से निकलना, दूसरे देह में जाना, खाये पिये से
मन का नवीन नवीन उत्पन्न होना, बढ़ना घटना और अन्य कार्यों में मन का
लगन; ये सब फल प्रारब्ध कर्मानुसार होते हैं, जो अदृष्ट है ॥ १७ ॥
और जब ऐसा नहीं होता तब-
२१८-तदभावे संयोगाभावोऽप्रादुर्भावश्च मोक्षः ॥ १८ ॥
( तदभावे ) उस कर्माऽरम्भ के अभाव में (संयोगाभावः) आत्मा का मन
आदि के साथ संयोग नहीं होता (च) और (अप्रादुर्भावः) जन्म नहीं
होता (मोक्षः) वही मोक्ष है ॥ १८ ॥
२१९-द्रव्यगुणकर्मनिष्पत्तिवैधर्म्यादभावस्तमः ॥ १६ ॥
(द्रव्यगुणकर्मनिष्पत्तिवैधर्म्यात् ) पृथिव्यादि द्रव्यों, रूपादि गुणों और
उत्क्षेपण आदि कर्मों की सिद्धि से विरुद्ध धर्म होने से (अभावः) प्रकाश
का न होना (तमः) अन्धकार होता है ॥
अर्थात् प्रकाश कोई स्वतन्त्र पदार्थ नहीं है किन्तु प्रकाश का अभाव ही
अन्धकार कहाता है और प्रकाश के अभाव का कारण द्रव्यों, गुणों और
कर्मों की सिद्धि का विपरीत होना है। तैल, बत्ती आदि द्रव्यों के वैधर्म्य से
दीपशलाका के न रगड़ने रूप कर्म से प्रकाश गुण का न होना ही अन्धकार
है; अन्धकार कोई भाव पदार्थ नहीं ॥ १९ ॥
२२०-तेजसो द्रव्यान्तरेणावरणाच्च ॥ २० ॥
(तेजसः) तेज के (द्रव्यान्तरेणावरणात्) अन्य द्रव्य का आवरण होजाने
से (च) भी [प्रकाश का अभाव = अन्धकार होता है] ॥ २० ॥
२२१-दिक्कालाबाकाशं च क्रियावद्वैधर्म्यान्निष्क्रियाणि ॥२१॥
(दिक्कालौ) दिशा और काल (च) और (आकाशम्) आकाश (नि-
ष्क्रियाणि) क्रियारहित पदार्थ हैं क्योंकि (क्रियावद्वैधर्म्यात् ) क्रिया वाले
पदार्थों से विरुद्धधर्मी हैं ॥
जो पदार्थ मूर्त्तिमान् होते हैं, उन में क्रिया होती है, इस के विरुद्ध
दिशा काल और आकाश अमूर्त्त हैं, इस वैधर्म्य से वे निष्क्रिय हैं। इस सूत्र
में चकार से शङ्कर मिश्रादि टीकाकार आत्मा का ग्रहण करते हैं, आत्मा भी
अमूर्त होने से निष्क्रिय है, यह दूसरी बात है कि आत्मा के सामीप्य से
मन और इन्द्रियों में क्रिया उत्पन्न होती है ॥ २१ ॥
१४