सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

Devanagarihipublished648 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 648 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 146

वैराग्यशतक

महापुरुष ज्ञान-दृष्टिसे कामिनी की असलियत को देख रहे हैं।
कामी लोग भी स्त्रियों की असलियत को बगौर देखें और इनसे घृणा
करें। वास्तवमें, स्त्री में कुछ भी नहीं है। सांस्वर्भ-हीन स्त्री
कंकाल है।

(पृ० ५८)

Popular Press, Calcutta.