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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

(ii)

[स्तम्भः १ / Column 1]
५५-मुकुरकल्पः
५६-दर्पणकल्पः
५७-पराङ्कुशः
५८-सम्मोहक्रियाकाण्डम्
५९-अंशुबोधिनी
६०-प्रपञ्चसारः
६१-शक्तिबीजम्
६२-शक्तिकौस्तुभम्
६३-यन्त्रकल्पतरुः ( लल्लप्रणीतः )
६४-मणिरत्नाकरः
६५-पटसंस्काररत्नाकरः
६६-विषनिर्णयाधिकार
६७-अशनकल्पः
६८-पाकसर्वस्वम्
६९-लोहाधिकरणम्
७०-बोधानन्दकारिका ( बोधानन्दकृता )
७१-लोहरहस्यम्
७२-परिभाषाचन्द्रिका
७३-विश्वम्भरकारिका ( विश्वभरकृता )
७४-संस्कारदर्पणम्
७५-प्रलयपटलम्
७६-षड्गर्भविवेकः

[स्तम्भः २ / Column 2]
७७-रघूदयः
७८-शक्तिसूत्रम् ( अगस्त्यकृतम् )
७९-शुद्धविद्याकलापम् ( आश्वलायनकृतम् )
८०-ब्रह्माण्डसारः ( व्यासप्रणीतः )
८१-अंशुमत्तन्त्रम् ( भरद्वाजकृतम् )
८२-छन्द कौस्तुभ ( पराशरप्रणीत )
८३-कौमुदी ( सिंहकोठकृता )
८४-हृपशक्तिप्रकरणम् ( अङ्गिरसकृतम् )
८५-करकप्रकरणम् ( अङ्गिरसकृतम् )
८६-आकाशतन्त्रम् ( भरद्वाजकृतम् )
८७-लोकसंग्रह ( विसरणकृत )
८८-प्रपञ्चलहरी ( वसिष्ठकृता )
८९-जीवसर्वस्वम् ( जैमिनिकृतम् )
९०-कर्मानिष्पार ( आपस्तम्बकृत ) ,
९१-रुकूहृदयम् ( अत्रिकृतम् )
९२-वायुतत्त्वप्रकरणम् ( शकटायनकृतम् )
९३-वैश्वानरतन्त्रम् ( नारदकृतम् )
९४-धूमप्रकरणम् ( नारदकृम् )
९५-ओषधिकल्पः ( अत्रिकृत )
९६-वाल्मीकिगणितम् ( वाल्मीकिकृतम् )
९७-लोहशास्त्रम् ( शाकटायनकृतम् )