बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रियग्रन्थमालापुष्प ४१
ब्रह्ममुनिग्रन्थमाला—पुष्पसंख्या १७
महर्षिभरद्वाजप्रणीत
बृहद् विमानशास्त्र
अर्थात्
महर्षिभरद्वाजप्रणीत "यन्त्रसर्वस्व" ग्रन्थान्तर्गत
यतिबोधानन्दकृतश्लोकबद्धवृत्तिसहित "वैमानिक प्रकरण"
जिस में—
पुरातन विमानकला का शिल्पकार ( लोहार-मिस्त्री ) से लेकर ब्रह्मा ( इञ्जिनियर ) पर्यन्त कार्य का वर्णन
दिया है, तथा रक्षाविधान अर्थात् शत्रु के द्वारा भूतल से फेंके हुए एवं भूमि के अन्तर्गुप्त प्रहारों से
और आकाश में विमानोंद्वारा किए गए आक्रमणों से रक्षा करने के उपाय साथ ही
आकाशीय पदार्थों वर्षा, वात, विद्युत्, शब्द, उल्का, पुच्छलतारों तथा ग्रहतारों की
कक्षासन्धियों से होने वाले आघातों से रक्षा करना एवं यन्त्रविधान
अर्थात् भिन्न भिन्न कलपुर्जों और अनेक आवश्यक रूपाकर्षक शब्दा-
कर्षक गतिमापक कालमापक आदि यन्त्रों के स्थापन तथा शकुन,
रुक्म, सुन्दर, त्रिपुर आदि विविध विमानों का अपूर्व
अद्भुत वर्णन है ।
सम्पादक एवं भाषानुवादक—
स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक
गुरुकुलकांगडी (हरिद्वार)
सम्पादन स्थान—
गुरुकुलकांगड़ी
प्रकाशक—
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा
दयानन्द भवन, नई दिल्ली १
प्रथम संस्करण } माघ २०१५ वि० { मूल्य
१००० } फरवरी १९५६ ई० { तेरह रुपये