त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 69
100/= का 5/= ब्याज (12×5×60)/(36×100) = 1 महीने में
अथ भिन्नोदाहरणम्
सार्धस्य शतस्य फलं मासत्र्यंशेन रूपमध्यर्धम्।
विचरणसप्तदशानां किं फलमर्धाष्टमैर्मासैः¹॥ ४५॥
न्यासः १/३ 15/2
201/2 67/4 लब्धं फलम् 5 कालाद्याप्तिः प्राग्वत्
३/२ ० ५/८
सुक्षेमा अनुवाद-प्र.का. १/३ मास में 100½ या 201/2 प्र.ध. रूप का 1½ या ३/२
रूप ब्याज प्राप्त होता है, तो 7½ = 15/2 इ.का. मास में 17 - 1/4 इ.ध. अर्थात् 16¾ या
67/4 रूप का कितना ब्याज होगा।
यहाँ ब्याज का पूर्वोक्त सूत्र-
ब्याज = (प्रमाणफल × इच्छाकाल × इच्छाधन) / (प्रमाणकाल × प्रमाण धन)
तदनुसार ⇒ ३/२ × 15/2 × 67/4 × ३/१ × २/२०१ = 18090/3216 = 5 + 2010/3216
2010 ÷ 402 = 5
3216 ÷ 402 = 8
अतः 5 + ५/८ रूप ब्याज
ज्ञात ब्याज के आधार पर काल-
सूत्र-
इ. का. (T.) = (ब्याज × प्र. का. × प्र. ध.) / (प्र. फ. × इ. ध.)
अतः 45/8 × १/३ × २०१/२ × २/३ × ४/६७ = 72360/9648
= 7 + 4824/9648 = 7 ½ या 15/2
ज्ञात ब्याज के आधार पर इ.ध. या मूलधन-
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 40, ग.सा.सं. 5.34, ग.ति.पृ. 76