त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 65
काल का ब्याज के | अथवा ऐकिक नियम
साथ समानुपात– |
ब्याज 5 36 | 60/= का 5/= ब्याज 100/60 महीने में
काल (महीना में) 100/60 x | 60/= का 1/= ब्याज 100/(60×5) महीना में
इस प्रकार 5 x = 36 × 100/60 |
x = (36×100)/(60×5) | 60/= का 36/= ब्याज (100×36)/(60×5) महीना में
इस स्थिति को क्रम बदलकर भी प्रदर्शित किया जा सकता है। जैसे–
काल का ब्याज के | अथवा ऐकिक नियम से–
साथ समानुपात– |
ब्याज 5 36 | 100/= का 5/= ब्याज 1 महीने में
काल (महीना में) 1 x | 100/= का 1/= ब्याज 1/5 महीने में
इस प्रकार 5 x = 36 |
x = 36/5 | 100/= का 36/= ब्याज 36/5 महीने में
काल का मूलधन से अथवा ऐकिक नियम से–
व्युत्क्रमानुपात–
मूलधन 100 60 | 100/= का 36/= ब्याज 36/5 महीने में
काल (महीना में) 36/5 x | 1/= का 36/= ब्याज 36/5×100 महीने में
इस प्रकार 60 x = 100× 36/5 |
x = (100×36)/(5×60) | 60/= का 36/= ब्याज (36×100)/(5×60) महीने में
स्पष्टतः सभी उपायों से पूर्वोक्त सूत्र प्राप्त कर लिया गया है।
ब्याज (I) के ज्ञात होने पर इच्छाधन मूलधन ज्ञात करना–
इसके लिये प्रश्न को इस प्रकार प्रस्तुत करेंगे–
1 महीने में 5/= रु. ब्याज 100/= रु. मूलधन पर बनता है तो 12 महीने में
36/= ब्याज कितने मूलधन पर बनेगा।