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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 208 में से

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पृष्ठ 38

10 त्रिशतिका
4095 8190-8100 (√(8×4095+1) - 1) / 2 = (√(32761) - 1) / 2 = (181 - 1) / 2 = 90
5050 10100-10000 (√(8×5050+1) - 1) / 2 = (√(40401) - 1) / 2 = (201 - 1) / 2 = 100
सैकं व्यवकलितपदं संकलितपदे निधाय संगुणयेत्।
पदयोर्विवरेण भवेद् दलीकृतं व्यवकलितशेषम्¹॥३॥
सुषेमा अनुवाद-1 संख्या सहित व्यवकलित पद (m) को संकलित पद
(n) के साथ जोड़कर योगफल को संकलित पद में से घटे हुए व्यवकलित पद के
साथ गुणा करे। पुनः दो से विभक्त करे। इससे व्यवकलित-शेष प्राप्त होता है।
अनुशीलन-इस श्लोक में संकलित की गई बड़ी संख्या के पद (n) तथा
ऐसी छोटी संख्या के पद (m) के परिज्ञान से बड़ी संख्या के संकलित में से छोटी
संख्या के संकलित के व्यवकलन या घटाने की विधि बताई गई है। सूत्र में (n)
पद को संकलित पद तथा इसमें से घटाए जाने वाले m पद को व्यवकलित पद
कहा है।
जैसे 1+2---+100 के पद (n) 100 होंगे तथा 1+2---+10 का पद (m)
10 होंगे। इस स्थिति में सूत्र का यह आकार प्राप्त होता है-
बड़ी संख्या के संकलित (Sn) - छोटी संख्या का संकलित (Sm) =
अथवा व्यवकलित शेष (D)= [(n-m) (n+m+1)] / 2
उदाहरण
Sn Sm D
5050 -55 = 4995 ⇒ (90×111) / 2 = 4995
सूत्र की उपपत्ति इस प्रकार है-
पूर्वसूत्रानुसार I बड़ी संख्या का संकलित = (n²+n) / 2
II छोटी संख्या का संकलित = (m²+m) / 2
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१. तुल. पाटी-गणित सू. 16,