त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished208 पृष्ठ
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राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली के कुलपति माननीय प्रो. वी. कुटुम्ब
शास्त्री जी एवम् उपनिदेशक माननीय डा. प्रकाश पाण्डेय जी ने ग्रन्थ की
उपादेयता, महत्ता तथा दुर्लभता का अनुभव करते हुए ग्रन्थ के प्रकाशन की
स्वीकृति प्रदान की है। अतः मैं आपके प्रति हार्दिक धन्यवाद एवम् आभार प्रकट
करता हूँ।
परिश्रम पूर्वक व्याख्या लिखे जाने पर भी कहीं मानवसुलभ त्रुटियाँ हो
सकती हैं, अतः भास्कराचार्य के शब्दों का उपयोग करते हुए-
ये वृद्धा लघवोऽपि येऽत्र गणका बद्ध्वाञ्जलिं वच्मि तान्।
क्षन्तव्यो मम तैर्मुदा यदि क्वचित् व्याख्याप्रमादो भवेत्।।
विदुषां विधेयः
'सुक्षेमा'-व्याख्याकारः
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