त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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120 त्रिशतिका
न्यासः
लब्धं फलम् 84
सुक्षेमा अनुवाद-किसी त्रिभुज वाले क्षेत्र की एक भुजा 13 तथा अन्य
पार्श्ववर्ती भुजा 15 है। इसकी 4 अधिक 10 अर्थात् 14 भूमि या आधार है तथा 12
शीर्षलम्ब है। इसका क्षेत्रफल क्या होगा।
अनुशीलन-सही नापियों के निम्नांकित चित्र का क्षेत्रफल इस प्रकार है-
अंकित संख्याओं से दुगुने मिलीमीटर हैं।
यहाँ श्लोक 43 के प्रथम सूत्र को समन्वित करने पर-
भुजयुतिदल या S = ½ (13+14+15) = 21
अतः क्षेत्रफल = √21 (21-13) (21-14) (21-15)
⇒ √21×8×7×6 ⇒ √7056 = 84 वर्ग हस्त
द्वितीय ‘कुदलं च लम्बहतम्’ अथवा ‘½ आधार × शीर्षलम्ब’ को समन्वित
करने पर-
7 × 12 = 84 वर्ग हस्त।
श्लोक उदा. 77 के अनुशीलन से इसकी उपपत्ति गतार्थ है।