त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें108 त्रिशतिका
n/2 {2a + (n-1)d} = s
n {2a + (n-1)d} = 2s
n {2a + nd-d} = 2s
2an + n²d-nd-2s = 0
dn² + 2an-nd-2s = 0
dn² + (2a-d)n-2s = 0
इस क्रम का अनुसरण करते हुए त्रिशतिकाकार के प्रथम उदाहरण को इस
प्रकार प्रस्तुत कर सकते हैं—
d a d S
5n² + (2x20-5) n - 2 × 245 = 0
⇒ 5n²+35n-490=0
इस स्थिति में पूर्वोक्त सूत्र—
n = (√1225+9800 - 35) / 10
= (105-35) / 10 = 7
इस सूत्र की उपपत्ति के लिये प्रस्तुत प्रश्न को बीजगणितीय समीकरण के
सामान्य नियमों द्वारा हल करते हैं-
5n²+35n=490
सभी पक्षों को 4a से गुणा करने पर—
⇒ 100n² + 700n = 9800
⇒ (10n)² + 2 × 10n × 35 + 35² = 1225 + 9800
(10n+35)² =1225+9800
10n + 35 = √1225 + 9800
n = (√1225 + 9800 - 35) / 10 = n = 7
इस प्रकार हमने ठीक वही सूत्र प्राप्त कर लिया है, जिसका उपरिलिखित
श्लोक में उल्लेख किया है। श्रीधराचार्य का वर्ग-समीकरण का सामान्य सूत्र तथा
आधुनिक सूत्र भी ठीक इसके अनुरूप है। अतः सिद्ध है कि वर्ग-समीकरण के