त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 132, कुल 208 में से
संदर्भ में पढ़ें104 त्रिशतिका
आदिधन (a) = s/n - (n-1) d / 2
इस सूत्र को सर्वधन के विस्तृत सूत्र द्वारा प्राप्त किया गया है। ऊपर जो
सर्वधन का सूत्र उल्लिखित है, उसमें l के स्थान पर उसका सूत्र लिखने पर सर्वधन
का विस्तृत सूत्र तथा उसके आदिधन का यह सूत्र इस प्रकार प्राप्त करते हैं–
सूत्र उदाहरण
सर्वधन¹७ s =n {2a + (n-1)d} 245 = 7/2 {2 × 20 + (7-1)5} = 7/2 × 70
= 490 / 2
⇒ 2s = n {2a + (n-1)d} 490 = 7{2 × 20 + (7-1)5} = 7 × 70
⇒ 2s/n = 2a + (n-1)d 490/7 = 2 × 20 + (7-1)5 = 40 + 30 = 70
⇒ 2a = 2s/n - (n-1)d 40 = 490/7 - (7-1)5 = 70-30
⇒ a = 2s/2n - (n-1)d/2 20 = 490/14 - (7-1)5/2 = 35-15
a = s/n - (n-1)d/2 20 = 245/7 - (7-1)5/2 = 35-15
इस प्रकार हमने आदिधन के लिये सर्वधन के द्वारा ठीक वही सूत्र प्राप्त
कर लिया है, जिसका श्लोक में उल्लेख है। वास्तव में बीजगणितीय समीकरण
के सामान्य नियमों के द्वारा किसी भी धन के परिज्ञान के आधार पर आदिधन का
पता लगाया जा सकता है। जैसे अन्त्यधन (ℓ) के आधार पर–
ℓ = a + (n-1)d 50 = 20 + (7-1)5 = 20 + 30
a = ℓ - (n-1)d 20 = 50-(7-1)5 = 50-30
मध्यधन के आधार पर–
m = (a + ℓ)/2 35 = (20 + 50)/2
2m = a + ℓ 70 = 20+50
a = 2m-ℓ 20 = 70-50
सर्वधन के सूत्र में उल्लिखित सूत्र के आधार पर–
s = n (a + ℓ)/2 245 = 7 (20 +50)/2 = 7 × 35