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तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi

सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा

DevanagariHindipublished334 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 334 में से

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पृष्ठ 43

20 भूमिका
इस ग्रन्थ के भाष्य तमिऴ में ही बारह से अधिक लिखे जा चुके हैं।
प्रत्येक में एक विशिष्ट विचार-धारा को प्रतिबिम्बित होते हुए हम स्पष्टतः देख
सकते हैं। इसके अनुवाद अन्य तीनों द्राविडीय भाषाओं में हो चुके हैं।
तेल्लुगु में श्री वेंकटराम विद्यानन्द ने ‘ त्रिवर्ग दीपिका ’ के नाम से आकस्मिक
स्वर्गवास के कारण केवल प्रथम दो खण्डों का पद्यानुवाद प्रस्तुत किया है।
कन्नड में श्री नरसिंहाचार्य ‘ नीति मंजरी ’ के नाम से सम्पूर्ण ग्रन्थ का सुन्दर
भाषान्तर तीन शताब्दियों के पूर्व ही कर गये हैं, और अभी श्री एल. गुण्डप्पा
का भी संपूर्ण भाषानुवाद प्रकाशित हो चुका है। मलयाळम् में श्री परमेश्वरन्
पिळ्ळै ने ‘ रत्न उद्धारकम् ’ के नाम से प्रथम दो खण्डों का भाषानुवाद किया है।
इतर भारतीय भाषाओं में से बंगाली में डा० नलिनी मोहन सानियाल
ने स्वर्गीय श्री वा० वे० सु० अय्यर के अंग्रेज़ी अनुवाद के आधार पर
प्रसिद्ध भाषा-शास्त्रज्ञ डा० सुनीति कुमार चटर्जी के प्राकथन के साथ सुन्दर
अनुवाद प्रस्तुत किया है। हिन्दी में श्री क्षेमानन्द राहत द्वारा चुने हुए
८९ अध्यायों का तथा प्रो० बी. डी. जैन द्वारा तीनों खण्डों का अंग्रेज़ी से
भाषानुवाद हो चुका है।
प्रस्तुत अनुवाद में मैंने तिरुक्कुरळ् के तमिऴ भाष्यों पर, विशेष रूप से
परिमेलऴग़र के भाष्य पर तथा अन्य टीकाओं व भाषानुवादों पर ध्यान रखते
हुए तिरुक्कुरळ के विशेषज्ञों से स्थान-स्थान पर परामर्श प्राप्त करके मूल
तिरुक्कुरळ का अनुसरण करने का प्रयत्न किया है।
अपने आदरणीय वाइस चान्सलर सर ए० लक्ष्मणस्वामी मुदलियार जी
को इस ग्रंथ का प्राक्कथन प्रदान करने के लिये मैं अपनी हार्दिक कृतज्ञता
सादर समर्पित करता हूँ।
मद्रास विश्वविद्यालय,
मद्रास ❭ सु. शंकर राजू नायडू
१ - ६ - १९५८ /