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तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi

सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा

DevanagariHindipublished334 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 334 में से

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पृष्ठ 42

भूमिका 19
(६) पोय्यामोष़ि नान्मुखनार
(७) वायुरै वाष़्त्तु मातनुवंगी
(८) तमिष़ मरै चेन्नाप्पोदार
(९) पोदु मरै पेरुनावलर


वस्तुतः तिरुक्कुरळ् का कोई अनुवाद उसके सम्पूर्ण काव्य-सौष्ठव को
व्यक्त नहीं कर सकता ।¹ वैसे इस ग्रन्थ का अनुवाद अनेक भाषाओं में
हो चुका है । भारतीय व अंग्रेज़ी के अतिरिक्त अन्य अनेक पाश्चात्य भाषा
साहित्यागार इस ग्रन्थ-रत्न के भाषान्तर से समृद्ध किये जा चुके हैं। केवल
अंग्रेज़ी में इसके बारह अनुवाद हो चुके हैं जिनमें पादरी श्री जी. यू. पोप,
वा० वे० सु० अय्यर, वी. आर. रामचन्द्र दीक्षितर आदि के प्रमुख हैं।
श्री एम. एरियल ने फ्रेंच में इसका अति सुन्दर अनुवाद किया है। डॉ०
ग्रॉल ने जर्मन तथा लैटिन भाषाओं में सन् १८५६ में अनुवाद करके क्रमशः
लैप्सिग तथा लन्दन से प्रकाशित किया है। इटालियन फ़ादर बेस्की जिन्होंने
अपना नाम 'वीरमामुनिवर', 'धैर्यनाथ स्वामी' व 'इसाती सन्यासी' रखकर
भारतीय वेश-भूषा में तिरुच्चिराप्पळ्ळी के निकटवर्ती एक नगर में चालीस वर्ष
रह कर तमिष़ भाषा के विशद अध्ययन के पश्चात् तिरुक्कुरळ् का लैटिन भाषा में
अनुवाद तथा तमिष़ भाषा तथा साहित्य पर अन्य अनेक ग्रन्थों की भी रचना की,
विशेष प्रशंसा के पात्र हैं। इन अनुवादकों ने तमिष़ को ही नहीं, अपितु
अपनी भाषा को भी प्रशोभित किया, और उसी के साथ-साथ तिरुक्कुरळ् के
दिव्य सन्देश को संसार के विभिन्न देशों तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त की।

  1. "No Translation can express its charming effect." — P. vi.
    Introduction to the Sacred Kural — by G. U. Pope