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सर्वकोश
तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi

सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा

DevanagariHindipublished334 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 334 में से

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पृष्ठ 35

12 भूमिका
कहा जाता है कि जब तिरुक्कुरळ् अन्य ग्रन्थों के साथ उस "संगप्पलहै" पर
रखा गया तो अन्य सभी ग्रन्थ जल में निमज्जित हो गये, और केवल तिरुक्कुरळ्
ही जल के ऊपर तैरता रहा। इस कथा में सत्य का अंश चाहे कितना ही क्यों
न हो, पर यह अवश्य माननीय है कि इसकी तुलना में तात्कालिक अन्य कोई
कृति नहीं ठहरती। यह अपने ढंग की एक ही कृति है। कविवर परणर ने
तिरुक्कुरळ् की तुलना वामनावतार से की है। भगवान ने वामनावतार लेकर दो
ही पग में सम्पूर्ण विश्व को नाप डाला था। इसी प्रकार 'पौने दो चरणों' का
प्रत्येक कुरळ् एक भाव-लोक को अपने में अन्तर्लीन किये हुए है। दूसरे एक
सत्कवि ने तिरुक्कुरळ् में विभिन्न विषयों की विशदता को अलौकिक काव्यगत
सौन्दर्य से पूर्ण¹ व्यक्त किया हुआ पाकर कहा है :—
सभी अर्थ इस में समाप्त,
जो इस में है न, नहीं अन्यत्र ॥²
यहाँ "अर्थ" से वही भाव है जो "वागर्थाविव सम्पृक्तौ, वागर्थ
प्रतिपत्तये" के "अर्थ" से है।
तिरुक्कुरळ् पर "क्षणे-क्षणे यन्नवतामुपैति । तदेव रूपं रमणीयतायाः ॥"
वाला सिद्धान्त पूर्णतः घटित होता है। जितना ही इसमें पैठकर अर्थ गाम्भीर्य का
अन्वेषण करते हैं उतना ही नवीन अर्थ का प्रकाश निस्सृत होता हुआ प्रकट होता
है। यह प्रकाश पाठक में उसके ज्ञान, अनुभव एवं व्यक्तिगत विचार-धारा की

  1. "Musaco Contingens Cuncta lopre" i. e., "touching all
    things with poetic Grace"—G. U. Pope.
  2. " எல்லாப் பொருளும் இதன்பாலுள ; இதன்பால்
    இல்லாத எப்பொருளும் இல்லையால்."
    (மதுரைத் தமிழ்நாயனார்.)