तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा
पृष्ठ 148, कुल 334 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय ४९ तिरुक्कुरळ 123-
४९. समय का बोध
४८१. दिन के समय उलूक पर (उससे दुर्बल) कौआ विजय प्राप्त कर
लेता है। शत्रु पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखनेवाले
सम्राट् के लिए तदनुकूल अवसर की आवश्यकता होती है।
४८२. समयानुकूल कार्यरत होना (अस्थिर) धन को स्थिर रखनेवाले
सूत्र के समान होता है।
४८३. आवश्यक साधनों के साथ काल को समझकर कर्म करनेवाले
के लिए असम्भव भी कुछ होता है ?
४८४. यदि समय एवं स्थान का विचार करके कर्म किया जाय तो
सम्पूर्ण संसार भी हस्तगत हो सकता है।
४८५. संसार को जीतने के इच्छुक निश्चलता के साथ अनुकूल
समय की प्रतीक्षा में रहेंगे।
४८६. उत्साहशील व्यक्ति का (समय का बोध पाकर) सिमटना
लड़ते हुए मेड़-का शत्रु पर आक्रमण करने से पूर्व अपने पैरों
को पीछे हटाने के समान होता है।
४८७. शत्रु में दोष देखकर बुद्धिमान झट वहीं क्रोध को व्यक्त नहीं
करते, अपितु समय को देखकर उस ज्वाला को मन में ही
समाये रखते हैं।
४८८. विरोधी को देखो तो (समय को समझकर तत्काल) विनीत हो
लो। अन्तिम काल आने पर उसका सिर अपने आप
नीचे गिरेगा।
४८९. प्राप्ति का सुअवसर प्राप्त हो तो असम्भव कार्य भी उसी
समय कर डालो।