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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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२ विवाहवृन्दावनस्य-
विषय पृष्ठाङ्क | विषय पृष्ठाङ्क
चतुर्थ द्वादश भाव दोष ३७ | राहु की गति का प्रमाण ५४
जन्मकालिक पापगत नवांश- | केतु की गति "
दोष और परिहार " | भोजराज का मत ५५
दोषान्तर ३८ | शयन से ही देवों का अहोरात्र ,,
| राहुसत्ता में प्रमाणान्तर ५७
लग्नबलप्रकरण ॥५॥ | षड्वर्गप्रकरण ॥८॥
ग्रहों के शुभाशुभ स्थान ३८ |
कर्तरी और जामित्र दोष ४१ | द्वादशभावसाधन ५८
गुरु शुक्र के बाल्यादि दोष " | ग्रहों की भावसन्धिका फल ५६
ग्रहबलोंमें विशेषता ४२ | राशि भाव के भेदमें निर्णय "
इन्द्रमत से कृपणता योग " | स्पष्ट सूर्य साधन प्रकार ६०
| लग्न और सूर्य से इष्टकाल "
चन्द्रबलप्रकरण ॥६॥ | लग्न से कालहोरा ज्ञान ६१
कोई वर का चन्द्रबल नहीं | पापहोराको निष्फलता "
देखता उसमें दोष ४३ | वारप्रवृत्ति ६२
ताराबल ४६ | इष्टकालसे होरेशज्ञान ६३
इसका सिद्धान्त " | अन्यदोष "
| षड्वर्ग कथन ६४
राहुसत्ताप्रकरण ॥७॥ | राशियों के स्वामी ,;
वराहमिहिर का मत ४७ | होरा-द्रेक्काण-द्वादशांश ६५
ग्रहण में राहु की छादकता ४८ | तिथ्यादि सन्धि "
राहु का स्वरूप " | मंगलादि ग्रहों का संक्रान्ति-
प्रतिमास में ग्रहण क्यों नहीं | काल ६६
होता है ४६ | वसन्तादि ऋतुज्ञान "
जातकसंहिता से राहुसत्ता " | ऋतुसन्धि ६७
भौमादिपात में ग्रहत्वाभाव ५० | सन्धि में विवाहफल "
प्रथम सम्पात राहु द्वितीय केतु ,, | दुष्टयोगों की सन्धि में विशेषता ६८
चन्द्रपात और उच्च में | नक्षत्रादि सन्धिघटीमान "
विशेषता ५१ | चान्द्रमाससन्धि ६६
पात ही राहु है ५२ | जन्ममासादि में विवाह निषेध "
उच्च कल्पनामात्र है ५३ | गुणदोषविवेचक की प्रशंसा ७०
राहु की दिनाधिपता क्यों नहीं ,, |