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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 118 में से

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निन्यानबे का चक्कर
एक दिन महाराज कृष्णदेव राय अपने दरबार में बैठे लोगोां० की फरियाद सुन रहे थे।
उनके पास उस दिन एक विचित्र समस्या लेकर एक फरियादी आया।
फरियादी ने अपनी समस्या महाराज के सामने इस प्रकार रखी, “महाराज! मैं एक गरीब
आदमी हूँ। मेरे पास एक मकान है जिसमें दो कमरे हैं। एक कमरे में मैं रहता हूँ तथा
दूसरे कमरे में एक किराएदार। मेरा किराएदार एक मोची है जो दिन-भर बाजार में लोगों
के जूतों की मरम्मत करता है और रात को घर आकर घंटों पूजा करता है।”
महाराज चकराए, ”अरे, यह तो अच्छी बात है। तब तो मोची भला आदमी है। ऐसे
आदमी से तुम्हें क्या परेशानी है?“
”हाँ, महाराज, वह भला आदमी है। मुझे समय पर किराया अदा करता है। किसी बात की
कभी झिक-झिक, खिच-खिच उसने मेरे साथ नहीं की है। रोज सुबह जगकर स्नान-ध्यान
करने के बाद ही वह अपने काम के लिए निकलता है।“ फरियादी ने कहा।
”तो फिर परेशानी क्या है?“ महाराज ने पूछा।
“महाराज! शाम को जब मोची पूजा करता है तब वह हाथ में ढोलक लेकर उसे पीटते
हुए जोर-जोर से भजन गाता है। उसके भजन गाने से भी मुझे कोई शिकायत नहीं है।
शिकायत है उसकी ढोल से, जिसकी धमक से मैं घंटों परेशान रहता हूँ और सो नहीं
पाता।” फरियादी ने कहा।
महाराज को फरियादी की वास्तविक परेशानी का अनुमान लग गया। थोड़ी देर मौन
रहने के बाद उन्होंने तेनाली राम से पूछा, “क्यों तेनाली राम! इस फरियादी का दुख-दर्द
दूर करने का तो एकमात्र उपाय यही है कि इसका कमरा खाली करा दिया जाए।”
“नहीं महाराज!“ तेनाली राम ने कहा, ”इस तरह के समाधान से तो मोची ही नहीं,
फरियादी भी परेशान हो उठेगा।”
“वह कैसे?” महाराज ने पूछा।
”महाराज! फरियादी ने साफ-साफ कहा है कि वह गरीब आदमी है। दो कमरों के मकान
का एक कमरा किराए पर देने से यह बात साफ हो जाती है कि उसे पैसों की जरूरत है
तभी वह एक कमरा किराए पर देने के लिए विवश हुआ है।”