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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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पृष्ठ 68

खुशियों का ठिकाना नहीं था। उन्होंने भोज का इतना भव्य आयोजन किया था कि उसकी
तुलना विजयनगर में हुए किसी भी अन्य भोज से नहीं की जा सकती। रसोई तैयार करने के
लिए विभिन्न पड़ोसी राज्यों से विशिष्ट रसोइए बुलाए गए थे। उनके बनाए व्यंजनों की
सुगन्ध से महामंत्री के आवास से दूर-दूर तक का वातावरण महमहा उठा। इस भोज में
महामंत्री ने महाराज कृष्णदेव राय और विजयनगर के सभी सभासदों को भी आमंत्रित
किया था।
भोजन करने के बाद महाराज ने महामंत्री से पौत्र का मुँह दिखाने को कहा। महाराज के
साथ सभी सभासद नवजात शिशु को देखने के लिए महल के अन्तःकक्ष में गए।
बच्चा एक सुन्दर से खटोले पर रखा गया था। छः दिनों की वय का शिशु प्रायः सोया
रहता है। महाराज जब शिशु के पालने के पास गए तब उन्होंने महामंत्री से कहा,
“महामंत्री जी! इस बात का ध्यान रखा जाए कि बालक की नींद में कोई व्यवधान न पड़े।
नवजात शिशु जितनी चैन की नींद सोएगा, उसका शारीरिक एवं मानसिक विकास उतने
ही अच्छे ढंग से होगा।”
पास खड़े एक अन्य सभासद ने महाराज की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा, “जी हाँ,
महामंत्री जी! ऐसे भी शिशु की नींद में दो ही कारणों से व्यवधान उत्पन्न होता है-पहला
यह कि शिशु को भूख लगती है और दूसरा यह कि वह बिस्तर गीला करता है। यदि आपकी
बहू सतर्क रहे, शिशु को समय पर दूध पिलाती रहे और बिस्तर गीला होते ही उसके
अधोवस्त्रा बदल दे तो शिशु की नींद में कोई अड़चन नहीं आएगी।”
महामंत्री इन लोगों की बातें मुस्कुराते हुए सुनते रहे।
इसी बीच वहाँ तेनाली राम पहुँचा और पालने पर झुककर बच्चे को देखने लगा। पालने
में सोया शिशु कुनमुनाया फिर जगकर अपने हाथ-पैर उछालने लगा। उसे देखकर तेनाली
राम ने महामंत्री से कहा, “यह बालक तेजस्वी है और आगे चलकर यह अपनी तेजस्विता
से नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसकी कीर्ति की गूँज दूर-दूर तक फैलेगी।”
महामंत्री ने एक मुग्ध -दृष्टि उस शिशु पर डाली और फिर महाराज एवं सभासदों को विदा
करने के लिए उनके साथ द्वार तक आए।
महाराज और सभासद जब राजभवन की ओर चलने को उद्यत हुए तभी एक सभासद ने
व्यंग्यात्मक स्वर में महाराज से कहा, “देखा महाराज, तेनाली राम किस तरह महामंत्री
को प्रभावित कर रहा था! आप ही सोचिए महाराज कि भला एक नवजात को देखकर यह
कैसे कहा जा सकता है कि वह भविष्य में क्या करेगा? तेनाली राम ने तो महामंत्री जी के
पौत्रा को ऐसा तेजस्वी बता दिया जिसकी कीर्ति की गूँज दूर-दूर तक सुनी जाएगी!”