तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 48, कुल 118 में से
संदर्भ में पढ़ेंथा कि महाराज, आपके पाँव में खुजली होती रहे। इससे उनका तात्पर्य यह था कि आप
लगातार घूम-घूमकर अपनी प्रजा का सुख-दुख जानते रहें। उनके आशीष के अन्तिम अंश
का यह भाव है कि आपके सभासद लगातार चिन्तातुर रहें। इसका अर्थ भी साफ है। जिस
राज्य का राजा स्वयं प्रजा के सम्पर्क में रहेगा, इससे उसके राज्य में कहीं भी कोई कदाचार
या अनाचार की घटना घटेगी तो उसका ज्ञान सीधे महाराज को होगा। इससे हर क्षेत्र के
सभासद हमेशा डरे रहेंगे कि कहीं भी कोई गलत बात होगी तो उसका पता महाराज को
हो जाएगा। वे महाराज की सक्रियता के कारण डरे भी रहेंगे और चिन्तातुर भी। उन्हें
हमेशा यह चिन्ता सताती रहेगी कि कैसे उनका कार्य निर्दोष हो। इस तरह चिन्तातुर
सभासदों और सक्रिय महाराज के कारण विजयनगर की प्रगति होगी। यही उस पुजारी जी
के आशीष का आशय है, महाराज!”
पुजारी जी के आशीष की यह व्याख्या सुनकर महाराज सन्तुष्ट हो गए। सभासदों ने
तेनाली राम की मीमांसा का करतल ध्वनि से स्वागत किया और उस सभासद का मुँह
लटक गया जिसने महाराज का कृपाभाजन बनने के लिए पुजारी जी की राह रोकी थी।