तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 43, कुल 118 में से
संदर्भ में पढ़ेंसभासद तेनाली राम की बात सुनकर चौंक पड़े।
महाराज ने तेनाली राम की ओर अविश्वास से देखा और पूछा, “क्या ऐसा हो सकता है
तेनाली राम?”
”जी हाँ, महाराज! मेरे इस रामबाण तरकीब को आजमाकर देखें। मेरी बात गलत
साबित हो जाए तो मैं एक भी स्वर्णमुद्राएँ दंड के रूप में राजकोष में जमा कराने का वचन
देता हूँ।”
महाराज ने कहा, ”ठीक है तेनाली राम! तुम अपनी तरकीब आजमाकर दिखा दो!“
”लेकिन महाराज! यदि मेरी तरकीब ठीक निकली तब मुझे क्या मिलेगा?“ तेनाली राम
ने पूछा।
महाराज ने तेनाली राम की ओर देखते हुए कहा, “मैं और इस दरबार के सारे सभासद
मिलकर तुम्हें एक भी स्वर्णमुद्राएँ देंगे।”
अब तेनाली राम महाराज के आसन के पास गया और आसन को थोड़ा उठाकर झटके से
छोड़ा। एक-दो खटमल झटके के कारण आसन से गिरे।
तेनाली राम ने अपनी थैली से चिमटी निकाली और एक खटमल को पकड़कर खरल में
डाला और मूसली से उसे कुचल दिया। फिर कहा, “महाराज! यही है वह रामबाण
तरकीब।“ आप चाहें तो इस तरह पकड़कर करोड़ों खटमलों को मारकर उनसे छुटकारा पा
सकते हैं।“
”अरे, यह तो ठगी है!“ महाराज ने चकित होकर कहा।
तेनाली राम ने विनम्रतापूर्वक कहा, “महाराज! मैंने इस भरी सभा में जो बात कही,
उसका अक्षरशः प्रयोग किया और जिस रामबाण विधि का प्रदर्शन किया उसे कोई गलत
साबित नहीं कर सकता। इसलिए मैं शर्त जीत चुका हूँ। आगे आपकी इच्छा!”
महाराज ने स्वीकार कर लिया कि तेनाली राम शर्त जीत चुका है तथा उसे तत्काल
राजकोष से एक भी स्वर्णमुद्राएँ देने का निर्देश देते हुए उन्होंने राज्य कोषागार के प्रधान से
कहा, ”सभासदों के मासिक वेतन से इसकी आधी राशि प्राप्त कर ली जाए। सभी सभासदों
के वेतन से समान राशि काटी जाए, क्यों?“ उन्होंने सभासदों की ओर, उनकी सहमति
जानने के लिए प्रश्न किया।
सभी सभासदों ने कहा, “ठीक है महाराज! हमें स्वीकार है।”